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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 111, कुल 408 में से

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पृष्ठ 111

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काशी अंचल की कहानी
काशी में बैठे-बैठे हम पंजाब की दुरवस्था की बात कुछ भी न जान पाए
थे । तो भी कुछ दिन तक पंजाब का कोई संवाद न पाने पर हम कुछ चिन्तित
होने लगे । रासबिहारी इस बार जब पहले पंजाब गए थे तब कह गए थे कि जल्दी
ही पंजाब से कुछ सिक्ख कार्यकर्त्ताओं को भेज देंगे, क्योंकि सिक्खों की पल्टन में
यदि सिक्ख ही जाकर काम करें तो खूब फल हो । पंजाब से जब करतारसिंह
आदि एक बार काशी आए थे तब उनकी ज़बानी भी सुना था कि रासूदा¹ शीघ्र
ही कुछ सिक्खों को इधर भेजना चाहते हैं । उस समय तक कानपुर, लखनऊ,
'फैजाबाद (अयोध्या) आदि शहरों में हमारे आदमी नहीं गए थे। विप्लव ठीक
कब आरम्भ होगा, यह संवाद एक आदमी हमारे पास ले आया था, और इसके
बाद हमें पंजाब का और कोई संवाद नहीं मिला था। पंजाब से कुछ लोग
सीधे फैजाबाद ज़रूर आए थे, एवं कानपुर और लखनऊ में भिन्न-भिन्न समय
'पर पंजाब से ही लोग भेजे गए थे । इधर हम लोग काशी की छावनी में आने-
जाने लगे । 21 फरवरी सन् 1915 रविवार को विप्लव शुरू होने की बात थी,
हम शनिवार रात तक काशी की छावनी में गए थे । उधर पंजाब में विप्लव की
तारीख 21 से हटाकर 19 कर दी गई थी उसका हमेंकुछ भी पता न था। शनिवार
रात को भी काशी की पल्टन के हवलदार और नायब हवलदार आदि ने हमें
आश्वासन दिलाया था कि विप्लव आरम्भ हो जाने पर वे निश्चय ही विप्लव दल
का साथ देंगे ।
किन्तु इस समय कई विचारों ने हमें एकदम चंचल कर दिया था । हम
लोग सोचते थे कि अंग्रेजों के विरुद्ध विप्लव करने जा रहे हैं, और यदि सचमुच
विप्लव आरम्भ हो गया तो अपने परिवारों को कहाँ किस दशा में रक्खा
जाएगा । विप्लव आरम्भ होने पर विप्लवी दल को दिल्ली ले जाकर दूसरे
विप्लवी दल के साथ मिलाना होगा। उस अवस्था में यदि अंग्रेज़ी फ़ौज आकर
काशी पर दखल करे तो हमारे परिवारों की क्या अवस्था होगी ? इस भावना

  1. बड़े भाई को बँगला में दादा कहते हैं, उसका संक्षेप 'दा' भी हो जाता है !