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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 109, कुल 408 में से

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पृष्ठ 109

पहली निष्फलता के बाद / 107
में रहे थे, दूसरे युवक का नाम हमारे समझने की सुविधा के लिए धरा जाता है,
गंगाराम । यह बहुत दिन तक फ़रार रहे। रासबिहारी और विनायकराव रात
को आठ बजे की गाड़ी से रवाना हुए। तय हुआ कि गंगाराम कुछ सिक्ख नेताओं
को लेकर दो-एक दिन बाद काशी आएँगे । करतारसिंह, हरनामसिंह और दूसरे
कई सिक्ख नेताओं ने काबुल जाना ठीक किया।
रासबिहारी जिस मकान में रहते थे वही मकान सबकी अपेक्षा बेखटक था,
क्योंकि इसका पता बहुत लोगों को न था। जिन सब मकानों पर वे भिन्न-भिन्न
लोगों से मिलते-जुलते थे, उन सब मकानों से इस समय कोई सम्बन्ध न रखा जाय,
रासबिहारी का यह विशेष अनुरोध था। किन्तु यह होने पर भी गंगाराम रास-
बिहारी को स्टेशन पर पहुँचाकर लौटते समय एक बार उसी पुराने मकान को
झाँककर देखने गए, उनकी इच्छा थी यदि खटका न देखा तो अपने बहुत-से
कपड़े-लत्ते जो उस मकान में थे लेते आएँगे । किन्तु पुलिस ने पहले से ही इन सब
मकानों के चारों ओर अपने आदमी रख छोड़े थे । गंगाराम ने उस मकान के
निकट जाकर झाँका ही था कि पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
पकड़े जाने के कुछ दिन के अन्दर ही गंगाराम ने पुलिस के नजदीक सब बातें
मान ली । उनके इज़हार से पुलिस ने उस मकान का सुराग भी पा लिया जिसमें
रासबिहारी अन्तिम बार ठहरे थे । उस मकान की खाना‌तलाशी लेने पर पुलिस
को उनके हाथ के लिखे दो-एक कागज़ भी मिले। इससे पहले जिन्होंने इज़हार
दिये थे उनसे ही पुलिस को पता लग चुका था कि रासबिहारी फिर पंजाब आए
थे और इसी लाहौर में थे। गंगाराम को पाकर उन्होंने यह भी सुन लिया कि
भयंकर धर-पकड़ के समय भी रासबिहारी लाहौर में ही थे । पुलिस यह भी
जान गई कि रासबिहारी काशी से आए थे और फिर काशी वापस चले गए हैं।
मौत के मुंह से इसी प्रकार रासबिहारी कई बार बचे थे। इससे बहुत दिन
पहले की बात है, एक दफे और रासबिहारी इसी लाहौर में आए थे, उस समय
तक वे देहरादून ही में नौकरी करते थे, कुछ दिन की छुट्टी ली थी और दिल्ली
होकर लाहौर की तरफ दल का काम-काज देखने आए थे। इधर दिल्ली में
खाना‌तलाशी और गिरफ्तारियां आरम्भ हो गईं। रासबिहारी इस बारे में कुछ
भी न जानते थे । दिल्ली की खाना‌तलाशी के फलस्वरूप पुलिस को दीनानाथ
नामी लाहौर के एक युवक का सन्धान मिला, एक आदमी के मकान पर रास-
बिहारी का ट्रंक और कपड़े-लत्ते आदि भी मिल गए। किन्तु लाहौर में रासबिहारी
ठीक किस जगह हैं इसका सुराग पुलिस को न मिला। तो भी दीनानाथ का
ठिकाना पुलिस को मिल गया और लाहौर मे उसे पकड़ लिया गया। तब भी
रासबिहारी लाहौर में थे । दीनानाथ जिस दिन पकड़ा गया उससे अगले दिन
शाम के समय डी० ए० वी० कालेज के बोर्डिंग के एक विद्यार्थी ने रासबिहारी के
पास आकर उन्हें दीनानाथ की गिरफ़्तारी की खबर दी। तब तक उन्हें यह
खबर न मिली थी। सबकी सलाह से तय पाया कि उसी रात रासबिहारी लाहौर