आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची
श्री सद्गुरु वे नमः
आयुर्वेद का कमाल
रोगों के निदान में
सद्गुरु नाम की औषधि, खरी नियत से खाय।
अंग रोग व्यापै नहीं महारोग मिट जाय ॥
—सत्गुरु मधु परमहंस जी
साहिब
बन्दगी
सन्त आश्रम रॉजडी, पोस्ट राया, ज़िला जम्मू
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
— सतगुरु मधुपरमहंस जी
प्रचार अधिकारी
— राम रतन, जम्मू
© SANT ASHRAM RANJRI (JAMMU )
ALL RIGHTS RESERVED
| First Edition | — | March, 2008 |
|---|---|---|
| Copies | — | 5000 |
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Editor
Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri
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Distt. - Jammu
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Mudrak: Sartaj Printing Press
विषय सूची
पृष्ठ संख्या
| 1. रोगों से बचे रहने के पाँच सर्वोत्तम फार्मूले | 9 |
|---|---|
| 2. रोगों के नाश में वनस्पति जगत का कमाल | 13 |
| □ अनिद्रा रोग है | 13 |
| □ अपच ( बदहजमी ) है | 13 |
| □ आँख आई है | 14 |
| □ आँख में जाला है | 15 |
| □ आँखों से दिखाई कम देता हो तो | 15 |
| □ आँखों में दर्द है | 16 |
| □ आँखों में फुँसी है | 17 |
| □ आग से जला है | 17 |
| □ आँखों में लालिमा है | 17 |
| □ आधे सिर में दर्द है | 18 |
| □ आँव पड़ रही है | 18 |
| □ आवाज़ बैठ गयी है | 18 |
| □ इन्फ्लूएंजा है | 19 |
| □ उच्च रक्तचाप है | 19 |
| □ उल्टियाँ हो रही हैं | 21 |
| □ कफ की खाँसी है | 21 |
| □ कफ ज्वर है | 22 |
| □ कब्ज है | 22 |
| □ कमर में दर्द है | 23 |
| □ काँच निकलती है | 23 |
| □ कान दर्द है | 24 |
| □ कामला ( पीलिया ) रोग है | 24 |
| □ काली खाँसी है | 25 |
| □ कैंसर है | 26 |
| □ कोढ़ है | 26 |
| □ खसरा है | 27 |
4
साहिब बन्दगी
| खॉसी है | 27 |
|---|---|
| खुजली है | 30 |
| खून की उल्टियाँ हो रही हैं | 31 |
| खून की कमी है | 31 |
| खूनी बवासीर है | 31 |
| गंज हो गयी है | 32 |
| गंडमाला ( कण्ठमाला ) है | 33 |
| गठिया है | 33 |
| गर्भ के समय रक्तस्त्राव | 34 |
| गर्भ के समय उल्टियाँ | 34 |
| गर्भ गिरने की आशंका है | 34 |
| गलगण्ड ( घेघा ) है | 35 |
| गले में दर्द है | 35 |
| गले में सूजन है | 36 |
| गुर्दे में दर्द है | 36 |
| ग्रहणी रोग है | 36 |
| घाव में कीड़े हो गये हैं | 37 |
| घाव हो गया है | 37 |
| घुटनों में दर्द है | 38 |
| चेहरे पर कौल-मुँहासे हैं | 38 |
| छाती में दर्द है | 40 |
| जलोधर रोग है | 40 |
| जुकाम है | 40 |
| जोड़ों में दर्द है | 42 |
| छाँड़ियों से चेहरा खराब है | 43 |
| टॉन्सिल है | 44 |
| टी. बी. है | 44 |
| दमा ( श्वास रोग ) है | 45 |
| दस्त हैं | 46 |
| दस्त में खून आ रहा है | 48 |
| दाद है | 48 |
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
5
| □ | दाँत निकल रहे हैं ( बच्चों के ) | 49 |
|---|---|---|
| □ | दाँत में कीड़े हैं | 49 |
| □ | दांतों में पीड़ा है | 49 |
| □ | दिमागी नुक़्स है | 50 |
| □ | नक़सीर आ रही है | 51 |
| □ | नपुंसकता है | 51 |
| □ | नाखुन नहीं बढ़ते हैं | 51 |
| □ | निम्न रक्त चाप है | 52 |
| □ | पथरी है | 53 |
| □ | पाचन शक्ति कमज़ोर है | 55 |
| □ | पाण्डु रोग है | 56 |
| □ | पायोरिया है | 56 |
| □ | पित्ती उछल आई है | 56 |
| □ | पित्त की खराबी है | 57 |
| □ | पित्त का ज्वर है | 57 |
| □ | पीठ में दर्द है | 57 |
| □ | पुराना कब्ज़ है | 57 |
| □ | पुराना ज्वर है | 58 |
| □ | पेट में कीड़े हैं | 59 |
| □ | पेट में दर्द है | 61 |
| □ | पेट में मरोड़ है | 62 |
| □ | प्रदर रोग है | 62 |
| □ | प्रमेह रोग है | 63 |
| □ | प्लीहा ( तिल्ली ) वृद्धि है | 64 |
| □ | प्रसव नहीं हो रहा है | 64 |
| □ | फोड़े-फुंसियाँ हैं | 65 |
| □ | बवासीर है | 65 |
| □ | बाँझपन है | 66 |
| □ | बाल गिर रहे हैं | 67 |
| □ | बिस्तर पर बच्चा पेशाब कर देता है | 68 |
| □ | बाल तोड़ है | 68 |
6
साहिब बन्दगी
| बालों में रूसी है | 69 |
|---|---|
| बोलने में हकलाहट है | 69 |
| भाग का नशा है | 69 |
| मधुमेह है | 69 |
| मलेरिया है | 71 |
| मसूड़ों में पीड़ा है | 71 |
| माथे में पीड़ा है | 71 |
| मासिक धर्म में रुकावट है | 71 |
| मासिक स्नाव अधिक है | 72 |
| मिरगी रोग है | 72 |
| मुँह आया है | 72 |
| मुँह में छाले हैं | 73 |
| मुँह से दुर्गंध आती है | 73 |
| मूत्र बार-बार आता है | 73 |
| मूत्र रुक-रुक कर आता है | 74 |
| मेदा कमजोर है | 75 |
| मोच आई है | 75 |
| मोटापा है | 75 |
| रक्त प्रदर है | 76 |
| रक्त विकार है | 76 |
| रक्त स्नाव हो रहा है | 76 |
| लकवा है | 77 |
| वात ज्वर है | 77 |
| वायु गोला ( गैस ) है | 78 |
| विष खा लिया है | 79 |
| वीर्य की कमी है | 79 |
| वीर्य पतला है | 79 |
| शरीर से दुर्गंध आती है | 80 |
| श्वेत प्रदर है | 80 |
| सन्निपात है | 80 |
| सफेद कोढ़ है | 81 |
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
7
| □ | सफेद दाग हैं | 81 |
|---|---|---|
| □ | सामान्य ज्वर हैं | 81 |
| □ | सिर में जुएँ हैं | 82 |
| □ | सिर में दर्द है | 83 |
| □ | सुनाई कम देता है | 84 |
| □ | सूजन है | 84 |
| □ | सूजाक है | 84 |
| □ | स्तनों में दूध की कमी है | 85 |
| □ | स्वप्न दोष है | 85 |
| □ | हाथी पाँव है | 86 |
| □ | हिचकियाँ आ रही हैं | 86 |
| □ | हिस्टोरिया है | 86 |
| □ | हृदय रोग है | 87 |
| □ | हैजा है | 88 |
- | विषधारियों ने काटा है | 89
- | कुछ ध्यान देने योग्य बातें | 92
- | प्राणायाम और योगासनों द्वारा स्वास्थ्य रक्षा | 95
□ | वस्त्रिका प्राणायाम | 95
□ | कपालभाती प्राणायाम | 95
□ | अनुलोमविलोम प्राणायाम | 95
□ | भुजंगासन की विधि | 96
□ | मत्स्यासन की विधि | 97
□ | वज्रासन की विधि | 98
□ | सिंहमुद्रासन की विधि | 98
□ | योग मुद्रासन की विधि | 99
□ | पद्मासन की विधि | 99
□ | धनुरासन की विधि | 100 - | चिंता का जहर छोड़ें भरोसे की दवा खाएँ | 101
नोट : दवा की जो भी मात्रा है, बच्चों को उससे आधी मात्रा ही देनी चाहिए
8
साहिब बन्दगी
दो शब्द संगत की ओर से
अपने हरमन प्यारे सतगुरु जी के चरण कमलों में अर्पण दो शब्द जिन्होंने देश सेवा के समय बड़ी सादगी से फौज की डियूटी करते समय अपना जीवन बिताया। आप पहरावे में फौज की हरी वर्दी में रहते हुए रोजाना शाम को सत्यसंग देते थे।
आप आम सैनिकों की तरह फिल्म देखने अथवा घूमने-फिरने कभी नहीं जाते थे। हमेशा एक ही धुन में रहें, या तो साहिब के भजन गाते या सत्संग करते थे।
अब मानव कल्याण के लिए आपने पूर्ण तौर पर अपने आप को अर्पण किया है। सुबह साहिब के कुल्ले का दरवाजा खुलने से पहले ही लोग लम्बी-2 कतारों में खड़े हो जाते हैं वह इन्तजार में होते हैं कि कब दरवाजा खुले और बन्दगी करते समय अपने दुःख तकलीफों का साहिब जी से हल करवा सकें।
इसके बाद भी जब साहिब जी को देखा तो संगत में घिरे हुए और मुस्कराते हुए देखा। दिन में घंटों सत्संग करने के बाद आप संगत की सेवा में हर समय व्ययस्थ रहते। मानव सेवा ही उनकी जिन्दगी का लक्ष्य है। ऐसा सन्त सतगुरु फिर शायद ही मिले जो अपने हाथों से संगत का भोजन भी बना कर देता हो।
आप जी सत्संग में आने वाले लोगों को सर्गुण भक्ति जो कि खुले तौर पर मूर्ती पूजा, जल पूजा, अग्नि पूजा, मड़ीया व मट्ट ठू पूजा, यज्ञ और हवन आदि के बिना दूसरी निर्गुण भक्ति जोकि इस शरीर की कोशिकायों को मुद्राओं द्वारा जगाने वाली भक्ति का खण्डन करके निरंजन अथवा काल पुरुष की इस भूल-भुलईया से निकाल कर सत्य भक्ति की ओर ले जाने का प्रयास करते हैं।
शरीर की बनावट के बारे में साहिब जी बड़ी सहजता से बताते हैं कि पांच तत्व, 25 प्रवितियाँ और तीन गुण ही काल का रूप है इसीलिए आप काल पुरुष के काया के नाम को छोड़कर, शरीर को चलाने वाली चेतना (आत्मा) को नाम देते हैं जिसको आपने विदेह नाम कहा। प्रथम आप ही हैं जिसने संसार को काल पुरुष और दयाल पुरुष का भेद दिया है। विदेह नाम पाने वाले को कमाई की जरूरत नहीं पड़ती इसके कुछ नियम हैं जिसमें रहकर वह खुद-ब-खुद महत्त्मा बन जाता है।
1. सत्य बोलना 2. शाकाहारी रहना 3. नशा ना करना 4. पर स्त्री गमन ना करना 5. चोरी ना करना 6. जूआ ना खेलना 7. हक हलाल की कमाई करना।
अनथक सतगुरु जी ने बहुत थोड़े समय में 103 से ऊपर आश्रम बना कर लाखों लोगों को सतलोक की सत्य भक्ति में लगा दिया है। मगर यह समाज कल्याण का काम मीडिया वालों को नजर नहीं आता। साहिब जी के जाने के बाद स्कूलों और कॉलेजों में इस सदगुरु जी के बारे में पढ़ाया जायेगा और खोजें होंगी।