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आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

प्राणायाम और योगासनों द्वारा स्वास्थ्य रक्षा

प्राणायाम और योगासनों

द्वारा स्वास्थ्य रक्षा

वस्त्रिका प्राणायाम

पद्मासन या सुखासन या कैसे भी बैठकर कमर को सीधा रखें। धीरे-धीरे दोनों नथुनों से स्वांस अंदर भरें। स्वांस नाभि तक जाना चाहिए और पेट थोड़ा अंदर की ओर जाना चाहिए। छाती स्वांस से फूली हुई नजर आनी चाहिए। बिना रोके अब धीरे-धीरे स्वांस को बाहर निकालें। इस तरह 3 से 5 मिनट तक करें।

कपालभाती प्राणायाम

पद्मासन या सुखासन में बैठकर दोनों हाथ दोनों घुटनों पर ज्ञानमुद्रा (छोटी उँगली और अंगूठे को मिलाते हुए बाकी उँगलियाँ सीधी रखें) में रखें। अब सांस को बाहर छोड़ें। ऐसे में नाभि को पीछे झटका लगेगा। सांस लेना बिलकुल नहीं है। एक बार छोड़ने और दूसरी बार छोड़ने के बीच में जो अंतर आता है, वो अपने आप ही अंदर चला जाता है।

सांस इस प्रकार छोड़ना है, मानो नाक साफ कर रहे हों और पेट को झटना लग रहा हो। यह भी 4-5 मिनट तक कर सकते हैं।

अनुलोमविलोम प्राणायाम

दाएँ नथुने को दाएँ हाथ के अंगूठे से बंद करते हुए बाएँ नथुने से धीरे-धीरे सांस ऊपर खींचें।

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साहिब बन्दगी

अब दाएँ हाथ की ही बीच वाली दो उँगलियों से बाएँ नथुने को बंद करते हुए दाएँ नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ दें। ऐसे में अंगूठा हटा लें।

अब दाएँ नथुने से पहले की तरह धीरे-धीरे सांस खींचें। फिर दाएँ हाथ के अंगूठे से दाएँ नथुने को बंद करते हुए बाएँ नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।

इस तरह से एक चक्र पूरा होगा। ऐसे आप 5 से 15 मिनट तक करें।

ध्यान रहे, शुरू करते समय बाएँ नथुने से सांस खींचनी है और समाप्त करते समय भी बाएँ नथुने से ही सांस को बाहर छोड़कर खत्म करना है।

लाभ: हृदय, मेदा, अंतर्द्वियाँ, ज्विगर, फेफड़े, दिमाग, कैंसर, लीवर आदि से संबंधित जितनी भी बीमारियाँ हैं, सबमें ये बहुत लाभकारी हैं।

भुजंगासन की विधि

पेट के बल इस तरह लेटें कि आपका माथा जमीन को छू ले और टोड़ी छाती से लग जाए। पैरों को मोड़कर बाहर की ओर करें। टाँगें एक साथ जोड़े रखें। हाथों को कंधे के पास रखें।

अब धीरे-धीरे हाथों के सहारे सिर को ऊपर उठाते जाएँ, पर बाहों पर ज्यादा भार न पड़े। ऐसा करते हुए आप अंदर की ओर सांस लें। पेड़ स्थान (नाभि के नीचे का स्थान) जमीन के साथ लगा रहे, बाकी शरीर को ऊपर उठा लें। आँखों से 90° ऊपर देखने का प्रयास करें। ऊपर जितनी देर रुक सकें, रुकें और खास बात ध्यान दें कि ऊपर जितनी देर रुकें सांस को भी रोके रखें।

अब धीरे-धीरे नीचे वापिस लाते हुए सांस को भी धीरे-धीरे

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छोड़ते जाएँ और हाथों को पीछे मोड़ लें।

अब पुनः इस प्रक्रिया को दोहराएँ। 3 बीर लगातार यह प्रक्रिया कर लें।

लाभ :

  • ❑ पेट की बीमारियों को ठीक करता है
  • ❑ कमर संबंधित रोग नहीं होने देता।
  • ❑ गुदों से संबंधित रोगों में बहुत लाभकारी है।

मत्स्यासन की विधि

सबसे पहले पद्मासन में बैठें। दोनों पैरों को एक-दूसरी जाँघ पर रखें।

अब कोहनियों के सहारे बाकी शरीर को धीरे-धीरे पीछे ले जाते हुए लिटा दें और हाथों से पैरों के अँगूठे पकड़कर कुछ देर इसी मुद्रा में रहें।

अब कमर को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर गर्दन को इस तरह पीछे की ओर मोड़ें कि सिर का ऊपरी भाग जमीन को स्पर्श करे और चेहरा पीछे की ओर हो जाए।

अब इस स्थिति में सांस लेते-2 कुछ देर के लिए रोक लें।

अब आपको वापिस सामान्य स्थिति में आना है। इसके लिए सबसे पहले आपने जो पैर के अँगूठे पकड़े हैं, उन्हें छोड़ें, फिर सिर और कमर को सामान्य अवस्था में लाकर लेट जाएँ। अब कोहनियों के सहारे से वापिस पद्मासन वासी स्थिति में पहुँचें। अब टोंगों को जाँघों पर से हटाएँ। यह सब क्रियाएँ धीरे-धीरे करें।

लाभ :

  • ❑ टॉन्सिल को ठीक करता है।
  • ❑ फेफड़े संबंधी रोग ठीक करता है।

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साहिब बन्दशी

  • □ जुकाम को ठीक करता है।
  • □ मुँहासे दूर करके चेहरे पर रंगत लाता है।

वज्रासन की विधि

घुटनों के बल बैठकर पाँवों को पीछे बाहर की ओर इस तरह फैलाएँ कि अँगूठे आपस में मिले रहें। अब एड़ियों पर बैठ जाएँ। अब दोनों हथेलियों को घुटनों पर रखें। अँगुलियाँ नीचे भी जा सकती हैं। सांस प्रक्रिया सामान्य ही चलती रहे। ध्यान दें कि रीढ़ की हड्डी बिलकुल सीधी रहे और सिर भी सीधा रहे। जितनी देर इस स्थिति में बैठ सकते हैं, बैठें।

लाभ :

  • □ कमर दर्द ठीक करता है।
  • □ पाचन क्रिया में लाभकारी है।

सिंह मुद्रासन की विधि

वज्रासन की तरह घुटनों के बल बैठें। अंतर यह रहे कि पैरों को बाहर की ओर न फैलाकर उनके अँगूठों की दिशा अंदर की ओर ही रखें और घुटनों को खुला-2 रखें।

अब शरीर को थोड़ा झुकाकर हाथों को उलटा करके जमीन पर फैलाकर रखें ताकि हाथों की उँगलियाँ घुटने को स्पर्श करें।

अब सिर को आगे की ओर झुकाकर ठोड़ी को छाती के साथ स्पर्श कराएँ और मुँह और नाक दोनों से बाहर की ओर सांस बाहर निकालते हुए जीभ को जितना हो सके बाहर निकालें।

अब इसी तरह से आँखों को चौड़ा करते हुए सामने की ओर देखें। मात्र तीन सेंकेंड बाद जीभ धीरे-धीरे वापिस अंदर करें और नाक

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से सांस लेते हुए वापिस साधारण स्थिति में आ जाएँ। यह प्रक्रिया दो-तीन बार कर सकते हैं।

लाभ :

  • ❑ टॉन्सिल ठीक करता है।
  • ❑ स्वांस संबंधी रोगों में लाभकारी है।

योग मुद्रासन की विधि

मृदासन में बैठ जाएँ। अब हाथों को पीछे पीठ पर ले जाएँ और एक हाथ से दूसरे की कलाई पकड़ लें। अब सांस को बाहर निकालते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर झुकेँ और सिर को जमीन से लगा दें। कुछ देर इस स्थिति में रहकर सांस अंदर की ओर लेते हुए धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठें। कम-से-कम 3-4 बार यह प्रक्रिया कर लें।

लाभ :

  • ❑ तनाव को दूर करता है।
  • ❑ पाचन संबंधी रोगों में लाभकारी है।

पद्मासन की विधि

टॉगों को सामने की ओर फैलाकर बैठें। अब दाईं टॉग को बाईं जाँघ पर रखें और फिर बाईं टॉग को दाईं जाँघ पर रख लें। पैरों की एड़ियाँ पेट से लग जाएँ। कमर, सिर, गर्दन आदि बिलकुल सीधे रहें। हाथों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर गोद में रख लें अथवा घुटनों पर रख लें। जितनी देर इस स्थिति में रह सकें, रहें और फिर वापिस आने के लिए पहले एक टॉग को पकड़कर उतारें और फिर दूसरी को।

लाभ :

  • ❑ पाचन क्रिया को ठीक करता है।
  • ❑ जोड़ों के दर्द में लाभकारी है।

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साहिब बन्दशी

धनुरासन की विधि

पेट के बल लेटें। अब घुटनों को मोड़कर टॉगें ऊपर की ओर ले जाएँ। अब सिर भी ऊपर की ओर उठाएँ। अब हाथों से दोनों टॉगों को पकड़ लें और धीरे-से खींचें, जिससे धनुष का आकार बन जाए। दृष्टि ऊपर की ओर रहे। जितनी देर रह सकें, रहने के बाद धीरे-से साधारण स्थिति में आएँ।

लाभ :

  • □ मंदाग्नि को दूर करता है।
  • □ कब्ज को दूर करता है।
  • □ बवासीर में लाभकारी है।
  • □ दिमाग़ तो ताक़त देता है।

नोट : प्रत्येक आसन को करने के बाद शवासन जरूरी है। इसके लिए तनावमुक्त होकर बाज़ुओं को ढीला छोड़कर आँखें बंद करके एक-डेढ़ मिनट के लिए लेट जाएँ और लंबी गहरी सांस लेते रहें।

ये आसन आपको कई छोटी-छोटी ही नहीं, बल्कि बड़ी-से-बड़ी बीमारियों से छुटकारा ही नहीं दिलाते, होने से भी बचाते हैं। इसलिए अपनी सुविधानुसार कुछ आसन और प्राणायाम आप नित्य करके अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।