औचित्यविचारचर्चा (महाकवि क्षेमेन्द्र - औचित्य रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् सटीक)
Aucitya Vicara Charcha of Kshemendra with Commentary
महाकवि क्षेमेन्द्र (टीकाकार: पं. ब्रजमोहन झा) द्वारा
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यथा श्रीहर्षस्य—
परिम्लानं पीनस्तनजघनसङ्गादुभयत-
स्तनोर्मध्यस्यान्तः परिमलनमप्राप्य हरितम् ।
इदं व्यस्तन्यासं श्लथभुजलताक्षेपवलनैः,
कृशाङ्ग्याः सन्तापं वदति बिसिनीपत्रशयनम् ॥
तन्वीपदसमानार्थकस्य कृशाङ्गीपदस्यानुरूपप्रयोगं दर्शयितुमाह-यथा
श्रीहर्षस्येति । परिम्लानमिति—रत्नावलीनाटिकाप्रधाननायिकायाः
सागरिकाया विरहावस्थासूचकम् पद्यमिदम् । पीनस्तनजघनसङ्गात्
पीनयोः अतिस्थूलयोः, स्तनयोर्जघनयोश्च, सङ्गात्सम्पर्कात्, उभयत
उभयत्र, परिम्लानं शुष्कप्रायं, तनोः क्षीणस्य, मध्यस्य मध्यभागस्य,
परिमलनं सङ्घर्षणम्, अप्राप्य न लब्ध्वा, अन्तर्मध्ये, हरितं स्वाभाविक-
रूपेण हरिद्वर्णकमेव स्थितमित्यर्थः, स्तनयोर्जघनयोश्चात्युच्चत्वेनाधो-
मुखं शयानाया नायिकाया मध्यभागस्य शय्यासम्पर्कविरहितत्वेन तत्रत्य-
शय्यायाः स्वाभाविकत्वं सुतरां सम्भवतीति बोध्यम् । श्लथभुजलता-
क्षेपवलनैः श्लथे शिथिले ये भुजलते बाहुबल्लर्यौ, तयोराक्षेपवलनैराकुञ्चन-
प्रसारणैः, व्यस्तन्यासं व्यस्तो विपरीतो न्यासः स्थापनं यस्य तथाभूतम्,
इदं पुरोवर्ति बिसिनीपत्रशयनं कमलपत्रशय्या, कृशाङ्ग्यास्तन्व्याः,
सन्तापं विरहज्वरज्वालां वदति कथयति ।
तन्वी शब्द के समान अर्थ रखने वाले कृशांगी पद का समुचित प्रयोग
दिखाने के लिये कहा गया है यथा—श्रीहर्षस्येति । परिम्लानमिति यह श्लोक
'रत्नावली नाटिका' से उद्धृत किया गया है—इसमें लंकेशकुमारी सागरिका की
विरहावस्था का सजीव चित्र खींचा गया है । वत्सराज उदयन के विरह में
सागरिका विह्वल हो गयी है । अंग सूखकर कृश हो गये हैं, विरहज्वर की
ज्वाला से कहीं भी उसे शान्ति नहीं मिलती, जिधर ही आँखें फिरती हैं उधर
ही उद्वेजक दृश्य दीख पड़ते हैं । अतः अधोमुख होकर कमलदलकल्पित शय्या
पर पड़ी रहती है । इस स्थिति में परितापसूचक अन्य चिह्नविशेष के न रहने
पर भी उसके संताप के संबन्ध में किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं होती,
क्योकि वह कमलपत्र की बनी शय्या ( जिस पर वह सोई रहती है ) ही उसके
संताप को प्रकट कर रही है । कारण, उस शय्या के पार्श्वदेश ( दोनों बगल )
उच्च कुच तथा स्थूल जघनों के संपर्क से मलिन हो रहे हैं, पर शय्या का मध्य
भाग कृश मध्य-उदर-भाग के स्पर्श को न पाकर हरा-ताजा बना हुआ है और