सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
औचित्यविचारचर्चा (महाकवि क्षेमेन्द्र - औचित्य रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् सटीक)

औचित्यविचारचर्चा (महाकवि क्षेमेन्द्र - औचित्य रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् सटीक)

Aucitya Vicara Charcha of Kshemendra with Commentary

महाकवि क्षेमेन्द्र (टीकाकार: पं. ब्रजमोहन झा) द्वारा

DevanagariHindipublished256 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 256 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 57

मूलस्थोदाहरणश्लोकानुक्रमणिका
अत्र वल्कलजुषः १४८ | कृष्णेनाम्ब ७२
अथ स विषय १४५ | क्रोधम् १८४
अदय ! दशसि १६८ | क्षीणश्चन्द्रो १३१
अयि विरहविचित्ते १६० | क्षीबस्ये ८३
अभिनव ४१ | खगोत्क्षिप्ते ४०
अयि विजहीहि १३० | गन्तव्यम् ८९
अश्वत्थाम १७८ | गाण्डीव ८५
अहो वा हारे ७८ | ग्रीष्मम् १२६
आचारम् १२८ | चिताचक्रम् ४३
आदाय १११ | चुम्बनसक्तः ५३
आलोके ते १९१ | चंद्रे सूचित १२४
आलोला १९० | च्युतसुमनसः १३६
आश्चर्यम् १५६ | जयत्युपेन्द्रः १०५
आहारम् ९९ | जातम् २५
इदमसुलभ १८१ | ज्यानिह्विया २७
इह निवसति ११२ | ज्यायान् १७५
उत्पत्ति १४६ | झणज्झणित १९२
उद्धर्तयति १९२ | तत्र स्थितम् ११४
उद्दामोत्कलिकाम् ४६ | तपो न तप्तम् १६७
ऊरुमूल ३० | तारुण्येन १८३
एतस्माज्जल ११० | तीक्षणान्त ८७
एतस्या ३६ | त्रैलोक्याक्रमणं १२०
कण्ठे मेखलया १० | दणुइन्द ६०
कण्ठे कृत्तावशेषं ६६ | दनुजेन्द्र ६०
कर्णाटीदश १४१ | दिङ्मातङ्ग १०६
कर्णात्तालित १६२ | दिवि भुवि १५२
कामः कामम् १८९ | देवो दयावान् २०
कुसुमशयनम् ७६ | देवो जानाति १३३
कृशः काणः ७१ | धीरः स किर्मीर २०