औचित्यविचारचर्चा (महाकवि क्षेमेन्द्र - औचित्य रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् सटीक)
Aucitya Vicara Charcha of Kshemendra with Commentary
महाकवि क्षेमेन्द्र (टीकाकार: पं. ब्रजमोहन झा) द्वारा
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नदीवृन्दो १५४ | योऽभूद्गोप १३५
नष्टं वर्ष ६७ | योऽयमश्वः २६
नायं निशामुख १२२ | यो यः शस्त्रम् ५८
नाले शौर्यमहो २२ | लाङ्गूलेन १०१
निद्रां न ११७ | लावण्य १६
निर्याते १७० | वरुणरण ११८
नीवार ६९ | विरोधी ९०
परिम्लानम् १८ | वर्णप्रकर्षे ४९
पुण्ये ग्रामे १४९ | विविधगहन १६५
पुरा यत्र १४१ | विश्रान्त २९
पौलस्त्य १०८ | वृद्धास्ते ६४
प्रम्लाने १७९ | सीतेनोद्घोषितस्य ४४
प्रत्यग्रो ५५ | शौर्याराधित ६१
बालेन्दु ४८ | श्येनाङ्घ्रि १५८
बुभुक्षितं १५२ | स कोऽपि १८८
भक्तिः कातरताम् १६३ | सग्गम् ९६
भग्नाहित १०२ | सत्यं मनोरमा ८
भोगे रोगभयं ७५ | सदा सक्तम् १०
मग्नानि १४ | समस्ता ७
महाप्रलय ३३ | सम्बन्धी २
माणं मुञ्चध ९० | सर्वापाय ७
मानं मुञ्चत ९१ | सर्वे स्वर्ग १३
मार्गे केतक ५२ | सीधुस्पर्श ५
मुक्तः कन्दुक १७३ | स्तनयुग ९
मृत्योरास्य १३८ | स्त्रीणां मध्ये ६
यः प्रख्यातजवः ९४ | स्वर्गमपारिजातम् ९
यत्पावंतो २९ | हारो जलाद्रं ३
युद्धेषु ३५ | हा नृप हा १९
हा शृङ्गार ५