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औचित्यविचारचर्चा (महाकवि क्षेमेन्द्र - औचित्य रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् सटीक)

औचित्यविचारचर्चा (महाकवि क्षेमेन्द्र - औचित्य रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् सटीक)

Aucitya Vicara Charcha of Kshemendra with Commentary

महाकवि क्षेमेन्द्र (टीकाकार: पं. ब्रजमोहन झा) द्वारा

DevanagariHindipublished256 पृष्ठ

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इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिये 'देशोपदेश' में गौड़ छात्र पर तथा 'नर्ममाला'
में राज्य के अधिकारियों, जैसे कायस्थ, नियोगी, चाक्रिक आदि पर बड़ी मीठी
चुटकियाँ ली गई हैं ।
जनता के चरित्र के सुधार तथा मनोरञ्जन की भावना से प्रेरित होकर
ही क्षेमेन्द्र ने रामायण तथा महाभारत की प्रख्यात कथाओं का संक्षिप्त वर्णन
रामायणमञ्जरी तथा भारतमञ्जरी ( रचनाकाल १०३७ ई० ) के नाम से
प्रस्तुत किया ।
इसके बाद क्षेमेन्द्र ने शालिवाहन ( हाल ) के सभाकवि गुणाढ्य द्वारा
पैशाची भाषा में रचित वृहत्कथा ( इसका मूलरूप आज अप्राप्त है ) का सरस
पद्यानुवाद प्रस्तुत कर प्राचीन कहानियों का खजाना पाठकों के लिये
खोल दिया ।
क्षेमेन्द्र की दूसरी विशाल कथात्मक कृति है 'बोधिसत्त्वावदान-कल्पलता'
जिसमें भगवान् बुद्ध के प्राचीन जन्मों से संबद्ध पारमितासूचक आख्यानों का
पद्यबद्ध वर्णन है। 'अवदान' का अर्थ है--शुभ्रचरित्र ।
क्षेमेन्द्र रचित 'सुवृत्ततिलक' छन्दःशास्त्र का अमूल्य ग्रन्थ है। इस तरह
वस्तुतः क्षेमेन्द्र अपने युग के महान् लेखक थे इसमें किसी को विप्रतिपत्ति नहीं
हो सकती ।
क्षेमेन्द्र वैष्णवधर्मावलम्बी थे, पर आज-कल के कतिपय वैष्णवों के समान
दुराग्रही नहीं थे। इनकी धार्मिक भावना अत्यन्त उदार थी । ये ब्राह्मणजातीय
थे यह बात उनके पूर्वजों के राजामात्य होने से भी सिद्ध होती है, क्योंकि
अमात्यपद पर प्राचीनकाल में ब्राह्मणों की ही नियुक्ति होती थी ।
क्षेमेन्द्र के ग्रन्थ
१. अमृततरङ्गकाव्यम्, २. अवसरसारः, ३. कनकजानकी, ४. औचि[त्य-]
विचारचर्चा, ५. कविविलासः, ६. कविकण्ठाभरणम्, ७. चतुर्वर्गसंग्र[हः,]
८. चारुचर्या, ९. चित्रभारतनाटकम्, १०. दर्पदलनम्, ११. दशावत[ार-]
चरितम्, १२. देशोपदेशः, १३. नीतिकल्पतरुः, १४. नीतिलता, १५. प[द्य-]
कादम्बरी, १६. पवनपञ्चाशिका, १७. बृहत्कथामञ्जरी, १८. बोधिसत्त्वावदा[न-]
कल्पलता, १९. भारतमञ्जरी, २०. मुक्तावली, २१. मुनिमतमीमां[सा]