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सर्वकोश
औचित्यविचारचर्चा (महाकवि क्षेमेन्द्र - औचित्य रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् सटीक)

औचित्यविचारचर्चा (महाकवि क्षेमेन्द्र - औचित्य रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् सटीक)

Aucitya Vicara Charcha of Kshemendra with Commentary

महाकवि क्षेमेन्द्र (टीकाकार: पं. ब्रजमोहन झा) द्वारा

DevanagariHindipublished256 पृष्ठ

पृष्ठ 143, कुल 256 में से

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colon?
Look between 'ध' and 'द्रि':
Wait! Look at:
क्रोध : द्रिक्तो...? No, look at the glyph:
Wait, is it "क्रोधोद्रिक्तोरुरोग..."?
Let's look at the syllables:
तीक्ष्णा-न्त-स्त्री-क-टा-क्ष-क्ष-त-हृ-द-य-त-या व्य-क्त-सं-स-क्त-र-क्ताः (Sragdharā metre: 21 syllables: 7 + 7 + 7)
Let's count:
तीक्ष्णा-न्त-स्त्री-क-टा-क्ष (6)
क्ष-त-हृ-द-य-त-या (7) -> तीक्ष्णान्तस्त्री (4) कटाक्ष (3) = 7
क्षतहृदयतया (7)
व्यक्तसंसक्तरक्ताः (7) -> 7+7+7 = 21! Sragdharā metre!
Now let's check line 2 for Sragdharā metre:
It must have 21 syllables:
क्रोधोद्रिक्तोरुरोग (7) :
क्रो (1) धो (2) द्रि (3) क्तो (4) रु (5) रो (6) ग (7) = 7!
व्रणगणगणना (7) :
व्र (1) ण (2) ग (3) ण (