औचित्यविचारचर्चा (महाकवि क्षेमेन्द्र - औचित्य रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् सटीक)
Aucitya Vicara Charcha of Kshemendra with Commentary
महाकवि क्षेमेन्द्र (टीकाकार: पं. ब्रजमोहन झा) द्वारा
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की हत्या के समय जिस कौशल ( छिपकर वार करना ) का परिचय दिया, ये
सब बातें किसे मालूम नहीं ? सभी कोई इन्हें खूब अच्छी तरह जानते हैं, इसलिए
उनकी चर्चा छोड़कर हमें युद्ध ही करना चाहिए ।
अत्राप्रधानस्य रामसूनोः कुमारलवस्य परप्रतापोत्कर्षासहिष्णोर्वीर-
रसोद्दीपनाय सकलप्रबन्धजीवितसर्वस्वभूतस्य प्रधाननायकगतस्य वीर-
रसस्य ताडकादमनखररणापसरणान्यरणसंसक्तबालिव्यापादनादिजनवि-
हितापवादप्रतिपादनेन स्ववचसा कविना विनाशः कृत इत्यनुचितमेतत् ।
अत्रोक्तपद्ये-प्रधानस्यामुख्यस्य, परप्रतापोत्कर्षासहिष्णोरन्यमहिमाऽ-
सहनशीलस्य, रामसूनोः रामपुत्रस्य, कुमारलवस्य, वीररसोद्दीपनाय
वीररसविवृद्धये, सकलप्रबन्धजीवितसर्वस्वभूतस्य, सम्पूर्णप्रबन्धजीवना-
धायकस्य, प्रधाननायकगतस्य मुख्यनायकनिष्ठस्य, रामवृत्तेरिति भावः,
वीररसस्य, ताडकादमनं ताडकाख्यसुन्दस्त्रीनिपातः, खरयुद्धापसरणं खर-
युद्धात्पादत्रयनिवर्तनम्, अन्यरणसंसक्तबालिव्यापादनमन्येन परेण सुग्री-
वेणेति यावत्, सह, रणे युद्धे, संसक्तस्य व्यालग्नस्य, बालिनो व्यापादनं
मारणम् इत्यादेर्जनविहितापवादस्य लोकप्रदत्तकलङ्कस्य, प्रतिपादनेन
कथनेन, कविनोत्तररामचरितनिर्मात्रा भवभूतिना, स्ववचसैव विनाशः कृत
इत्येतदनुचितं नितरामायुक्तम् ।
उपर्युक्त पद्य में दूसरे के प्रताप को नहीं सह सकने वाले, प्रस्तुत ग्रन्थ
( उत्तररामचरित ) के अप्रधान पात्र, रामपुत्र कुमार लव की वीरता को बढ़ावा
देने के लिए, संपूर्ण प्रबन्ध के जीवातुभूत, प्रधान नायक रामवृत्ति वीर रस का
स्त्री ( ताड़का ) दमन, खरयुद्ध से पलायन तथा सुग्रीव के साथ युद्ध करते हुये
बालि की छल से छिपकर हत्या करना आदि लोकापवाद के प्रतिपादन से कवि
( भवभूति ) ने खुद अपने ही शब्दों के द्वारा विनाश कर दिया है जो कि
नितान्त अनुचित है ।
भयानके यथा श्रीहर्षस्य—
कण्ठे कृत्तावशेषं कनकमयमधः शृङ्खलादाम कर्षन् ।
क्रान्त्वा द्वाराणि हेलाचलचरणरणत्किङ्किणीचक्रवालः ।
दत्तात्तङ्कोऽङ्गनानामनुसृतसरणिः संभ्रमादश्वपालैः,
प्रभ्रष्टोऽयं प्लवङ्गः प्रविशति नृपतेर्मन्दिरं मन्दुरायाः ॥