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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 511, कुल 530 में से

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पृष्ठ 511

तुल्यं मोक्षेऽपि । नाध्यक्षेणेति चेत्, तर्हि दुरितक्षयकामस्य
कर्मानुष्ठानानर्थक्यप्रसङ्गः, तदभावतत्फलाभावयोरप्यनध्यक्ष-
त्वात् । उपलब्धियोग्यतापन्नानिष्टनिवृत्तिरूपत्वादयमदोष-
इति चेत्, तुल्यम् ।
दुःखवत् सुखस्याप्युच्छेदादकाम्योऽयमिति चेत्, न,
तृष्णया दोषतिरस्कारेण प्रवृत्तिवदलंप्रत्ययेन गुणतिरस्कारान्नि-
यदि कहो कि—कण्टक निकल जानेपर प्रथम कालमे दुःखनिवृत्तिका
अनुभव होता है, इसलिये उसके पुरुषार्थ होनेमे कोई बाधा नहीं है।
अर्थात् कदाचित् अनुभूयमान होना ही पुरुषार्थका लक्षण है—तो यह
बात आत्यन्तिकी दुःखनिवृत्तिरूप मोक्षमे भी तुल्य है। अर्थात् शब्द,
अनुमान आदि द्वारा मोक्षकालिक दुःखनिवृत्ति भी अनुभूयमान ही है।
यदि कहो कि—उस दुःखनिवृत्तिका शाब्दबोध या अनुमिति होनेपर भी
साक्षात्कार नहीं होता है, अत वह पुरुषार्थ नहीं हो सकता है—तब तो
पापनाशकी इच्छासे प्रायश्चित्तादि कर्मोंका अनुष्ठान ही अनर्थक हो
जायगा। क्योंकि पापाभाव और पापके फलस्वरूप दुःखके अभावका
भी साक्षात्कार नहीं होता।
यदि कहो कि—प्रायश्चित्त-जन्य दुःखनिवृत्तिके प्रत्यक्षसे उपलब्ध-
मान न होनेपर भी उपलब्धिकी योग्यतासे युक्त दुःखनिवृत्तिरूप होनेसे
यहाँ कोई दोष नहीं है। अर्थात् पुरुषार्थ होनेके लिये उपलब्धि अपे-
क्षित नहीं है, किन्तु उपलब्धिकी योग्यता अपेक्षित है। तथा वह
योग्यता प्रायश्चित्त-जन्य दुःखप्रागभावमे भी है, क्योंकि उसका प्रतियोगी-
भूत दुःख उपलब्धिके योग्य है—तो ऐसी उपलब्धि-योग्यता आत्यन्तिक
दुःखनिवृत्तिरूप मोक्षमें भी तुल्य है।
यदि कहो—दुःखके समान सुखका भी इस पक्षमे उच्छेद हो जाने
से दुःखनिवृत्तिरूप मोक्ष किसीका काम्य नहीं हो सकता—तो ऐसा नहीं
कह सकते। क्योंकि जैसे, अत्युत्कट रागवश अगम्यागमनादिमे दोष
की उपेक्षा कर उसमे अविवेकीकी प्रवृत्ति होती है, वैसे ही सुख-
साधनों में विवेकियोंको अलबुद्धि (अनपेक्षाबुद्धि) होनेसे उनके गुणोंकी
उपेक्षा कर सुख साधनोंसे निवृत्ति भी देखी जाती है। इसमें मधु