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आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 503, कुल 530 में से

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पृष्ठ 503

अनुपलम्भवाद | ४५१

अविवेकिभिश्च पाषण्डिसंसर्गात् शौण्डिकादिवत् । न त्वेवं
प्रकृते, पित्रादिक्रमेण प्रवर्तनात् । योगाभ्यासाभिमानिभि-
श्चाव्यग्रताभिसन्धेः सुभूत्यादिवत् । न त्वेवं प्रस्तुते, प्रथमस्य
कर्मकाण्ड एव नियोगात् ।
अयोग्यैराजीवनात् सामान्यश्रमणकवत् । न त्वेवं प्रक्रान्ते,
आगन्तुकानामधिकारात् । कुहकवञ्चितैः समीचीनप्रत्ययात्
दीपङ्करसुषिरदर्शिशालिशवत् । न त्वेवं प्रकृते, तदभावात् ।

चार्यप्रभृति बौद्धोंके द्वारा हुआ था। ऐसी बात वेदके सम्बन्धमें नहीं
है। क्योंकि कुतर्काभ्याससे पहले ही बालभाव अर्थात् मोहावस्थासे
उन्मुक्त होते ही वेदपरिग्रहमें प्रवृत्ति होती है।
एव, अज्ञानियोंके द्वारा ही पाखण्डियोंका संसर्ग पाकर सौगतादि-
आगमोंका परिग्रह किया गया है। जैसे, शौण्डिकप्रभृतिने किया था।
वेदके सम्बन्धमें यह बात नहीं है। क्योंकि पित्रादि-परम्परासे ही
वेदमें प्रवृत्ति होती है न कि पाखण्डियोंके संसर्गवशसे ।
एव, योगाभ्यासका मिथ्या अभिमान रखनेवाले व्यक्तियोंके द्वारा
कर्मकाण्डके लिये व्यग्र न होनेके अभिप्रायसे बौद्ध आगमोंका परिग्रह
किया गया है। जैसे सुभूतिप्रभृति बौद्धोंने किया था। किन्तु वेदके
सम्बन्धमें ऐसी बात नहीं है। वैदिक आगमके अनुसार गार्हस्थ्यके
बाद ही योगविधि एवं उपासनाआका उपदेश किया गया है। इसलिये
प्रथम प्रथम अत्यन्त कष्टमय गृहस्थ कर्मोंमें ही नियुक्त किया जाता है।
अथवा अपनी जीविकाके सम्पादनमें स्वयं असमर्थ व्यक्तियोंद्वारा
जीविकाके रूपमें बौद्धागमोंका परिग्रह किया गया है। जैसे, सामान्य
नामक भिक्षुको बौद्धोंने बहुत धन देकर अपने धर्ममें प्रवृत्त करा लिया
था। एसी बात वेदके सम्बन्धमें नहीं है। क्योंकि आगन्तुकोंका
अर्थात् पाखण्डियोंका इसमें अधिकार ही नहीं है।
अथवा ऐन्द्रजालिकोंसे ठगे गये व्यक्तियों भ्रमसे समीचीन (यथार्थ)
समझ कर सुगतादिकोंके आगमोंका ग्रहण कर लिया। जैसे, काठके बने
बहुत छिद्रवाले यन्त्रविशेषमें एक ही दीप रखा हुआ रहता है, किन्तु