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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 37, कुल 530 में से

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पृष्ठ 37

सभव नहीं है। क्योंकि शून्यतामे यदि कोई प्रमाण है, तो सर्वशून्यता
कहाँ हुई ? यदि शून्यतामे प्रमाण नहीं है तो सर्वसत्ता ही सिद्ध हो
गयी।
एवं, लोकव्यवहारमें बाह्यार्थकी सत्ता व्यवस्थित होनेपर भी विश्वमें
अलीकत्व शून्यत्व या विचारासहत्वका सिद्ध करनेका उपक्रम किया जाय
तो बौद्धकी अपनी प्रतिज्ञा भी अनवस्थित हो जायगी। अर्थात् बौद्धका
विज्ञान, उसका दर्शन और उसका सिद्धान्त भी अव्यवस्थित हो जायगा।
इसलिये यह विश्व तथ्य है।
गुणगुणिभेदभङ्गवाद—
बौद्धमतानुसार गुण और गुणीमे भेद नहीं होता है। ज्ञानगुण
है। अत ज्ञानगुण और गुणी आत्मामे भेद नहीं है। अर्थात् ज्ञान
से भिन्न गुणी आत्मा नहीं है। यही उनका नैरात्म्यपक्ष है।
किंतु यह पक्ष ठीक नहीं है। क्योंकि गुणसे गुणी भिन्न
होता है। कारण, "यमहमद्राक्षं तमहं स्पृशामि अथवा यमस्प्राक्षं त
पश्यामि" इस प्रतीतिमें दर्शन और स्पर्शनके द्वारा एक ही विषयका
ग्रहण होता है। यहाँ गुण दो हैं—दर्शन और स्पर्शन। और ये
दोनों ही परस्परमे भिन्न हैं। जैसे चैत्रके द्वारा गृहीत विषयका
प्रतिसंधान मैत्र नहीं कर पाता और मैत्रद्वारा दृष्ट विषयका प्रति
संधान चैत्रको नहीं होता है वैसे ही नेत्र द्वारा देखो गया वस्तुका
प्रतिसन्धान त्वगिन्द्रिय नहीं कर सकती है और त्वगिन्द्रियद्वारा छुए
गये पदार्थका प्रतिस धान आखका नहीं हो सकता है। त्रिन्तु उक्त
प्रतीतिमे प्रतिसन्धान होता है कि जिसे मैने देखा था, उसे ही छू
रहा हूँ या जिसका स्पर्श किया था उसे ही देख रहा हूँ। यहाँ दो
प्रकारके भिन्न भिन्न ज्ञानोंमें एक ही विषयका प्रतिस धान होता है।
इससे सिद्ध है कि उक्त दोनों ज्ञानोंसे अतिरिक्त गुणी आत्मा है,
जो "दोनों भिन्न भिन्न ज्ञानोंमें एक ही विषय है" ऐसा आकलन कर
लेता है। यदि दर्शन और स्पर्शन गुणोंसे भिन्न एक गुणी आत्मा नहीं
होता तो उक्त प्रकारका एकार्थका प्रतिसन्धान नहीं होता।
यहाँ ज्ञानका विषय क्या है, यह विचारणीय है। क्या दोनोंका
केवल रूप या केवल स्पर्श विषय है ? या दो भिन्न भिन्न विषयोंका