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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 27, कुल 530 में से

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पृष्ठ 27

ख्यातो गोवर्धनाचार्य उमापतिधरस्तथा ।
शरणो जयदेवश्च धोयी कविनृप क्रमात् ॥
यहाँ लक्ष्मणसेनकी सभामें गोवर्धनाचार्यके रहनेसे उनके शिष्यका उस
कालमें रहना सुतरा सिद्ध है । किन्तु १०२९ शकवर्षके निकटमें
अथवा उसके बादमे ९०६ शकवर्षमें वर्तमान उदयनाचार्यका रहना
असम्भव होनेसे लक्ष्मणसेनकी सभामे वर्तमान गोवर्धनाचार्यके शिष्य
उदयनाचार्य कोई अन्य ही उदयनाचार्य थे । ऐसा मानना चाहिये ।
एव, १३०० शकाब्दमें वर्तमान जयदेवरचित गीतगोविन्दके टीका-
कार उदयनाचार्य भी कोई अन्य ही थे । क्योंकि ९०६ शकवर्षके साथ
उक्त शकाब्दका विरोध स्पष्ट है । इसलिए ९०६ शकवर्ष उदयनाचार्यका
स्थितिकाल सर्वथा असंदिग्ध है ।
श्रीउदयनाचार्य परमभगवद्भक्त एव आस्तिकशिरोमणि थे । इसके
सम्बन्धमें भविष्यपुराणके परिशिष्टमे निम्नलिखित वर्णन हुआ है—
एक समय कोई बौद्धाचार्य अपने शिष्यों सहित बौद्ध सिद्धान्तोंको
प्रकट करनेके उद्देश्यसे तिरहुत ( मिथिला ) के राजदरबारमे पहुँचा
और अहङ्कारके साथ अपने एक शिष्यको दूतके रूपमे राजाके पास इस
सन्देशके साथ भेजा कि जाओ और मेरे शब्दोंमें मिथिलेशको कहो
कि हे राजन् ! आप वेदशास्त्रोंसे व्यर्थ ही भ्रममें पड़े हो । मेरे शास्त्रको
देखो और मेरे मार्गका अनुगामी बनो । यदि इस प्रदेशमे कोई
व्यक्ति वेदमतकी स्थापना कर सकनेवाला हो तो उसे बुलवाओ कि वह
मेरे साथ विचार करे । राजाने बौद्धाचार्यके दूतकी उस बातको
सुनकर कहा कि जाओ, अपने गुरुसे कहो कि मैं भ्रममे हूँ या वह भ्रममे
हैं, यह निश्चय करना बहुत बडी बात है । कल प्रातः सभामे आवो,
उसमे व्यक्त हो जायगा । यह सुनकर वह दूत राजाके कथनको अपने
गुरुसे निवेदित किया ।
राजाने तत्काल प्रदेशके बहुत पण्डितों को, जिनमें उदयनाचार्य
प्रमुख थे, बुलाकर कहा । अहो, अत्यन्त विद्वान् नास्तिकका इस राज
में आगमन हुआ है, इनके साथ आप लोग शास्त्रार्थ करें । यदि वह
जीत जाते हैं तो मैं और आप सभी उनके मतके अनुयायी हो जायेंगे ।
यदि आप सबकी विजय होती है, तो मैं आप सबकी सेवा करूँगा,
इसमें संशय नहीं है । यह सुन सभी विद्वान् मौन रहे किन्तु उदयना-