अश्ववैद्यकम् (जयदत्त सूरि - विस्तृत अश्व-रोग निदान एवं शल्य-चिकित्सा महाग्रन्थ)
Ashvavaidyaka of Jayadatta Suri with Commentary
जयदत्त सूरि (सम्पादक: उमेशचन्द्र गुप्त कविरत्न) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ २ ]
३ सर्व्वलक्षणाध्याये—
पृ० श्लो० ।
” कयाहलक्षणम् ... ... ३६—१०१
” सेराहलक्षणम् ... .. ३६—१०१
” सुरुङ्गकलक्षणम् ... ... ३६—१०१
” नीलकलक्षणम् ... ... ३६—१०२
” पियूहलक्षणम् ... ... ३६—१०२
” खियाहलक्षणम् ... ... ४०—१०२
” इलाहखड्गाहकुष्णाहलक्षणम् ... ४०—१०३
” उराहलक्षणम् ... ... ४१—१०४
” वेराहलक्षणम् ... ... ४१—१०५
” उकनाहलक्षणम् ... ... ४१—१०६
” पुच्छकविशेषेण कोकाहादीनां संज्ञान्तर-
कथनम् ... ... ... ४२—१०७-११०
” वाजिदेहगतवर्णानां शुभाशुभलक्षण-
कथनम् ... ... ... ४३—१११-१२४
” अष्टमङ्गललक्षणम् ... ... ४३—११३
” मक्षिकाद्य ... ... ... ४४—११५
” पञ्चभद्रलक्षणम् ... ... ४५—१२०-१२१
” खरकथनम् ... ... ४६—१२५
” महादोषकथने ... ... ४८—
” काकुदीलक्षणम् ... ... ४९—१४०
” कराबीलक्षणम् ... ... ४९—१४१
” हीनदन्तलक्षणम् ... ... ५०—१४१
” अधिकदन्तलक्षणम् ... ... ५०—१४२-१४५
” एकाण्डलक्षणम् ... ... ५१—१४६