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सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 73, कुल 80 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 73

योग्यम्) । 'अवध्यमवधाहार्ये स्यादनर्थक्यवार्ययोः'`

Line 13:
(अनेकार्थ० ३.२०७६) ।

Line 14:
• संतया = वे हैं, जैसे- 1 सं.-तानि यथा । पालि-सेय्यथा (तथ्यथा) ।

Line 15:
• सुके = शुक । सं.-शुकः । (√शुच् दीप्तौ से) पक्षिविशेषः । कीरः ।

Line 16:
पालि-सुको, सुवो । प्रियदर्शिनः । 'शुको व्याससुतकीरयोः' (अनेकार्थ० २.२३४)।

Line 17:
वडचगुण्डः । विशि० ।
Wait, look at line 17:
Wait, let's look at the line above • सारिका =:
पालि-सुको, सुवो । प्रियदर्शिनः । 'शुको व्याससुतकीरयोः' (अनेकार्थ० २.२३४)।
Wait, does it have वडचगुण्डः । विशि० ।?
Wait! Look closely at the word after (अनेकार्थ० २.२३४)।:
Wait, does it have वडचगुण्डः? No!
Wait, look below `(अनेकार्थ० २.