सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
पृष्ठ 72, कुल 80 में से
संदर्भ में पढ़ें... wait, is there an au matra? "सं.-पारलौकिकाय।" or "सं.-पारलिकाय।"?
Look at the text: "सं.-पारलिकाय।" - wait, look above 'ल': there is an 'ि' matra!
Ah, "पारलिकाय"? Wait, is it "पारत्रिकाय"?
Wait, look at the next line:
"[पारित्रिकं-परत्र भवं, हितं वा। परलोकहितकारके कर्मणि पारलोक्यं च।
(शब्द०)]। पालि-परत्थ (पत्थ)।"
Wait, "[पारित्रिकं-परत्र भवं..." or "[पारत्रिकं-"?
It is "[पारित्रिकं-"!
• ल्हुका = रज्जुक (नाम के उच्च अधिकारी)। सं.-रज्जुकाः।
Wait, is it "ल्हुका" or "लजुक"?
Wait! Look at the Prakrit word in the edict:
In the Pillar Edict IV: "लजूका मे..."
Let's look at the letter:
It's 'ल', then 'जू', then 'का' -> "लजूका" or "रजूका"?
Wait, look closely:
The first letter is 'ल', then 'जू' (ज with ū-matra), then 'का' -> "• लजूका = रज्जुक..."
Wait, why did I think 'ल्हुका'? Ah