सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
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१२६ / सम्राट अशोक के अभिलेख
• पदिसंवालिचेलेसु = पक्षियों और जलचरों पर। सं.-पक्षिप्राणिचेलेषु।
वारिचरः-वारिषु चरति। मत्स्ये जन्तुमात्रे। (शब्द०)। पालि-पक्खी (पक्षी)।
वारि (वारि)।
• विविधे = नाना प्रकार के। सं.-विविधः। (विभिन्ना विधा यस्य।)
'विविधेषु बहुविधो नानापक्षः पृथग्विधः' (अभिधान० ६.१४६६)।
पालि-विविधो।
• अनुगहे = उपकार। कृपा। सं.-अनुग्रहः। 'अनुग्रहोऽभ्युपपत्तिः'
(अभिधान० ६.१५०८)। 'अनुग्रहः अनुकम्प्यं' (शब्द०)। पालि-अनुग्गहो
(अनुग्रहः)।
• आ पानदीनाये = प्राणदान देने तक। सं.-आ प्राणदीक्षायाः।
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