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सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 65, कुल 80 में से

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पृष्ठ 65

११४ / सम्राट अशोक के अभिलेख
• सुभासिते = सुभाषित। सङ्कन। सं. -सुभाषितम्। पालि-सुभासितं (सुभासितानि)।
• हमियाये = मेरे द्वारा। सं. -मया। पालि-मया।
• दिसेया = देखा जाता है (अर्थात्, उचित समझा जाता है)। सं. -दृश्येत। पालि-दिस्सेत, दिस्सति।
• सधम्मे = सद्धर्म। सं. -सद्धर्मः। पालि-सद्धम्मो।
• अलहाति = योग्य हों। सं. -अर्हन्ति। पालि-अरहंति (अर्हति)।
• वातवे = बखान करने के लिए। सं. -वक्तुम्। पालि-वत्तुं।
• धंमपलियायानि = धर्म-पर्याय। सं. - धर्मपर्यायाः। 'पर्यायोऽवसरे क्रमे। निम्नांगौ द्रव्यधर्मे चा' (अनेकार्थ० ३.१०९३)। पर्यायः-अनुक्रम, प्रकारे, अवसरे, निम्नांगे, द्रव्यधर्मभेदे समानार्थीयके शब्दे चा' (शब्द०)। पालि-धम्मो (धर्मः)। परियायो (पर्यायः)।
• विनयसमुकसे = विनयसमुत्कर्ष। सं. -विनयसमुत्कर्षः। पालि-विनयो (विनयः)। समुक्कंसो (समुत्कर्षः)।
• अलियवसानि = अलियवसानी। सं. -आर्यवासाः। पालि-आरियवसो।
• अनागतभयानि = अनागतभयानि। सं. -अनागतभयानि। पालि-अनागतो (अनागतः)। भयं (भयम्)।
• मुनिगाथा = मुनिगाथा। सं. -मुनिगाथा। पालि-मुनि (मुनिः)। गाथा (गाथा)।
• मोनेयसूते = मोनेयसूत। सं. -मौनेयसूत्रम्। पालि-मोनेय्यं (मौनेयम्) सूतं (सूत्रम्)।
• उपतिसपसिने = उपतिष्यप्रश्न। सं. -उपतिष्यप्रश्नः। पालि-उपतिस्सो (उपतिष्यः = सारिपुत्र को नाम)।
• लाघुलोवादे = राहुल को उपदेश। सं. -राहुलोवादः। 'अववादस्तु निर्देशो निदेशः शासनं च सः।' (अमरो २.१७६२)। 'अववादस्तु निर्देशे निन्दाद्विद्यप्रभयोपि' (अनेकार्थ० ४.२५०९)। 'अववादः- निन्दायाम्, विश्वासे, आज्ञायाम्, अवलम्बने चा' (शब्द०)। पालि-राहुलो। ओवादो (अववादः)।


लघु शिला अभिलेख - शब्द-विवेचन / ११५
• मुसावादे = मुसावाद। सं. -मृषावादम्। 'मृषा मिथ्या च वितथे' (अमरो १.४.२३)। (मृषा-मृषयत इति। मिथ्या।)। मृषावादः -'मिथ्यावाक्ये यथा दर्शितनास्तित्वादिकवाक्यम्' (शब्द०)। पालि-मुसा (मृषा)। वादो (वादः)।
• अधिगिच्य = के बारे में। सं. -अधिकृत्य। पालि-अधिकिच्च।
• भिखुपांये = भिक्षु। सं. -भिक्षुपादाः। पालि-भिक्खु (भिक्षुः)।
• भिखुनिये = भिक्षुणियां। सं. -भिक्षुक्यः (अथवा भिक्षुण्यः)। भिक्षुक-पु. स्त्रियां ङीप् इति (शब्द०)। पालि-भिक्खुनी (भिक्षुणी)।
• अभिसिनं = बार-बार। सं. -अभीक्ष्णम्। (अभीक्ष्णम् अभिक्षणं भवति। डा. बनारसीसेनः प्रद्युतः कालः।-नि० २.२५)। 'अभीक्ष्णं तु भृशं नित्यम्' (अनेकार्थ० ३.७८१)। 'अभीक्ष्णं पुनः पुनः। असकृन्मुहुः।' (अभिधान० ६.१४३.१)। पालि-अभिक्खणं।
• सुणेयु = सुनें। सं. -शृणुयुः। पालि-सुणन्तु।
• उपधालयेयु = धारण करें। सं. -उपधारयेयुः। पालि-उपधारेति। (उपधारयति)।
• उपासिका = उपासिकाएं। सं. -उपासिकाः। पालि-उपासिका (उपासिका)।
• एतेनि = इस। सं. -एतेन। पालि-एतेन।
• अभिप्रेतं = अभिप्राय को। सं. -अभिप्रेतम्।
• जानंतु = जानें। सं. -जानन्तु। पालि-जानेय्य।
लघु शिला : ब्राम्ही अभिलेख
• सुवर्णगिरीते = सुवर्णगिरि से। सं. -सुवर्णगिरितः। (गिरिः पर्वतः समुद्रौर्णो भवति - नि० १.२०)। 'सुवर्णं-सुष्ठु वर्णोऽस्य। स्नानामख्याते धातुभेदे।' (शब्द०)। 'स्वर्णं सुवर्णं कनकं हिरण्यं हेम हाटकम्। तपनीयं शातकुम्भं गाङ्गेयं भर्म कर्वुरम्॥' (अमरो २.९५१)। पालि-सुवण्णो (सुवर्णः)। गिरि (गिरिः)।
• अयपुतस = कुमार के। सं. -आर्यपुत्रस्य। पालि-अय्यपुत्त (Woolner) अथवा अय्यो (आर्यः), पुत्तो (पुत्रः)।
• महामाताणं = महामात्रों के। सं. -महामात्राणाम्। (महामात्राः-महती मात्रा मर्यादा परिमाणं यस्य। प्रधानः।) 'महामात्राः प्रधानानि' (अमरो २.७४२)।
महामात्र-पुं. '........ मात्रा तु महती येषां महामात्रास्तु ते स्मृताः।' प्रधानमात्ये।