सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
DevanagariHindipublished80 पृष्ठ
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११२ / सम्राट अशोक के अभिलेख
• पवतिसु - चट्टानों पर। सँ. - पर्वतेषु। ['पर्वतः पर्ववान्' (सि० १.२.२०)।
'पर्वतो गिरिरेष्वर्थः' (अनेकार्थ० ३.८७५)।] पालि - पब्बतो (पर्वतः)।
• लेखापेत - लिखा गया है। सँ. - लिखा गया है। पालि - लेखेति, लिखापेति।
• वालत - सुयोग (उपस्थित) होने पर। सँ. - वालतः। ['निवहवसतो वालो'
(अमर० ३.२३३५)।] पालि - वालो।
• हद - यहाँ। सँ. - इह। पालि - इध।
• अथि - है। सँ. - अस्ति। पालि - अत्थि।
• सालावचे त - लिखवाया (अर्थात् उत्कीर्ण करवाया) जाना चाहिए।
सँ. - लेखयितव्यः इति।
• एतेना - इस। सँ. - एते