सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
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१०४ / सम्राट अशोक के अभिलेख
• निठुलियेन = निष्ठुरता (विह्मी) से। सं. -नैष्ठुर्येण। 'निष्ठुरः कष्टदः
क्रूरः परुषः कर्कशः खरः' (अमरको० ६.३२८६)। पालि -निट्ठुरो (निट्ठुर)।
• तूलनाय = त्वरा (जल्दबाजी से)। सं. -त्वरणेन। 'त्वरा वेगो
रंहीऽभित्वरार्था विल्मसाहनं च।' (शब्द०)। पालि -तूर (वैदिक-तूर) का
प्रयोग अन्य शब्दों के साथ ही होता है, यथा तुरगो, तुरङ्गो, तुरङ्गी (तुरगः,
तुरङ्गः, तुरङ्गमः = घोड़ा)।
• अनवुतिय = अनवृत्ति (अर्थात, अभ्यास छूट जाने) से। सं. -अनावृत्त्या
• आलसियेन = आलस्य से। सं. -आलस्येन। (आलस्यम् – अलसस्य