सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतीनों की विद्यमानता • हाथी, बैल और घोड़े के बीचोंबीच एक 'धर्मचक्र' का अंकन [यह 'धर्मचक्र' भगवान बुद्ध द्वारा प्रदान उन चौबीस प्रत्ययों का सूचक प्रतीत होता है जिनसे यह सृष्टि का व्यापार चलता है।]`
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सम्राट अशोक की प्रसिद्धि जिन कारणों से है, वे हैं:
• कुशलतम प्रशासन
• नगरों का निर्माण
• बहुत बड़ी संख्या में विहारों, स्तंभों एवं स्तूपों का निर्माण
• प्रस्तर शिलाओं और स्तंभों पर प्रजाजन एवं अधिकारियों के निमित्त अपने आदेशों, अनुदेशों, अपेक्षाओं का उत्कीर्णन
• पत्थरों पर कलाकारी
• समाज सेवा के कार्य
• लोगों में 'विपश्यना ध्यान' की प्रवृत्ति जगाना
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[iv] सम्राट अशोक के अभिलेख
आज के एशियाई देशों में बुद्ध की शिक्षा में विश्वास रखने वाले लोग बहुत
बड़ी संख्या में मिलते हैं।
किस देश में किस स्थविर को भेजा गया, इसकी तालिका नीचे दी गयी है -
स्थविर देश
१. मज्झन्तिक कश्मीर एवं गंधार
२. महारक्षित यवन (