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सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 5, कुल 80 में से

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पृष्ठ 5

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[Left Page]

[ii] सम्राट अशोक के अभिलेख
जीवनकाल में यह अवन्ति नाम के जनपद का प्रशासक रह चुका था जिसकी
राजधानी उज्जयिनी (उज्जैन) थी। उस समय वह अठारह वर्ष का ही था। इस
प्रकार बाल्यकाल से ही इसे प्रशासन का अच्छा-खासा अनुभव हो गया था जो
बाद में इसके लिए बड़ा उपयोगी सिद्ध हुआ।
अशोक का जन्म ईसापूर्व ३०४ में हुआ था। मास्की में पाये गये अभिलेख
से इसका नाम 'अशोक' होना विदित होता है, अन्यथा अन्य अभिलेखों में इसे
'देवानांप्रिय' अथवा 'प्रियदर्शी राजा' कहा गया है। ये दोनों अशोक के नाम न
होकर उसकी मानपदवियां थीं, जैसे आजकल 'His Majesty'।
अशोक की पहली पत्नी का नाम देवी था जिससे उसे पुत्र महेंद्र और पुत्री
संघमित्रा संतान के रूप में प्राप्त हुए। दूसरी पत्नी कारुवाकी से इसे तीवर नाम
का पुत्र प्राप्त हुआ। असंधिमित्रा इसकी अग्रमहिषी मानी जाती है। दिव्यावदान
के अनुसार धर्मविवर्धन (कुणाल) नाम का पुत्र पद्मावती की को