सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 80 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 7

यहाँ प्रस्तुत पृष्ठों का पंक्ति-दर-पंक्ति लिप्यंतरण नीचे दिया गया है:


[पृष्ठ vi]

[vi] सम्राट अशोक के अभिलेख
यह ज्ञातव्य है कि अशोक ने अल्पाय काल में ही अपने साम्राज्य में यत्र
तत्र ८४,००० स्मारक खड़े करवा दिये थे। यह मान्यता है कि भगवान बुद्ध
एवं उनके प्रमुख शिष्यों के उपदेशों की संख्या इतनी ही होने के कारण उसके
द्वारा ८४,००० स्मारकों का निर्माण-कार्य हाथ में लिया गया था।
सम्राट अशोक द्वारा शिलाओं, स्तंभों, गुफाओं पर उत्कीर्ण अभिलेखों की
संख्या ४२ तक पहुँच चुकी है। इनमें से ३६ भारत में, २ नेपाल में, २
पाकिस्तान में और २ अफगानिस्तान में हैं। अफगानिस्तान में पाये गये
अभिलेख 'खरोष्ठी' लिपि में हैं। इन सभी अभिलेखों को ऐसे स्थानों पर
उत्कीर्ण किया गया था जहां पर अधिक-से-अधिक लोगों का ध्यान इनकी ओर
आकृष्ट हो सके। विद्वानों ने अभिलेखों का वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया है:
• शिला अभिलेख (गिरनार, कालसी, मानसेहरा, धौली, जौगड़, इत्यादि)