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सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 56, कुल 80 में से

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पृष्ठ 56

Here is the complete and accurate transcription of the text from both pages (Page 94 and Page 95) of the book सम्राट अशोक के अभिलेख:


[पृष्ठ ९४]

९४ / सम्राट अशोक के अभिलेख
• हते = मारे गये। सं.-हतम्। (हत - 'नाशितो। प्रतिहते, प्रतिरुद्धे, आशारहिते, गुणिते चा' (शब्द०)। पालि-हतो (हतः)।
• बहुतवकं = (उससे) कई गुना। सं.-बहुतावकम्। पालि-बहु (बहु)। तावतकं (तावकः)।
• मृटे = मर गये। सं.-मृताम्। 'मृतं मृतौ याचिते च' (अनेकार्थ० २.२०१)। पालि-मतो (मृतः)।
• ततो पच = उसके पश्चात। सं.-ततः पश्चात्। 'पश्चात् प्रतीच्यां चरमे' (अनेकार्थ० १७९२)। पालि-ततो (ततः)। पच्छा (पश्चात्)।
• अधुन = अब। सं.-अधुना (अस्मिन्काले)। 'साम्प्रतमधुनेदानीं सम्प्रति' (अभिधान० ६.१५३०)। पालि-अधुना