सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 50, कुल 80 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 50

).
Let's transcribe every single word and line accurately.

Let's read Page 82 in detail:

Header:
८२ / सम्राट अशोक के अभिलेख

Lines on Page 82:
• वयसि = पशुशाला में। सं.- व्रजे। (व्रजः-व्रजन्ति सहोभूय गावश्चा
गोष्ठम् ।) । 'व्रजः समूहे, गोष्ठे, पथि, मधुरासमीपस्थे देशभेदे च' (शब्द०)।
'प्रजन्त्यस्माद् गाव इति व्रजो घोषः गोवाटो वा उच्यते।' (उद्ग) [or (उद्व) / (उद्ग०)]
Let's look closely at '(उद्ग)' or '(उद्द)' or '(उद्ध)'?
It looks like '(उद्द)' or '(उद्ध)' or '(उ०)'?
Wait, "उज्ज्वलदत्तः"? "उणादिसूत्रवृत्ति" by Ujjvaladatta: (उज्ज्व०) or (उद्ग)?
Wait, look at the letters: 'उ' 'द्' 'ग' -> wait, it's (उज्ज्व)? No, look at: (उ०)?
Let's check the letters: '(' then 'उ' then 'द्' with something below? 'द्व'?
Wait, let's zoom in on: (उ... )
Letters: ( then उ द् `