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सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 49, कुल 80 में से

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पृष्ठ 49

द्धम्-बध्यते स्म इति। बन्धयुक्तं, नियमितम्। पालि-बन्धनां।)"
Wait, let's look at the first word of L17:
"(बद्धम्-बध्यते स्म इति। बन्धयुक्तं, नियमितम्। पालि-बन्धनं।)"
Wait, is it "पालि-बन्धनां" or "पालि-बन्धनं"?
In L18: "पालि-बन्धनं।"

Check L21:
"• मोखाये = रिहाई के लिए। सं.- मोक्षाय। (मोक्षः-मोक्ष्यते दुःखमनेनेति।"
Wait, look at end of L21:
"दुःखमनेनेति।" - yes, 'दुः' 'ख' 'म' 'ने' 'ने' 'ति'।

Check L22:
"'मोक्षो निःश्रेयसे वृक्षाद्विशेषे मोचने मृता' (अनेकार्थ० २.५७३)।"
Wait, is it "मृता" or "स्मृतः"?
Look at L22: "मोचने" then "मृ" "तौ"? No, "स्मृतः"!
'स्' 'मृ' 'तः'!
"मोचने स्मृतः" - in Sanskrit lexicons: '...मोचने स्मृतः'।
Yes, 'स्मृतः'!

Check L24:
"• एवं अनुबंधा = इस