सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
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७८ / सम्राट अशोक के अभिलेख
• आदिकरे = पहल करने वाला। सं.-आदिकरः। पालि-आदि (प्रथम्-आदिकम्)।
• कचंति = करता है। सं.-करोति। पालि-करोति।
• ममया = मेरे द्वारा। सं.-मया। पालि-मया।
• ममा = मेरे। सं.-मम। पालि-मम।
• नतानं = नाती। सं.-नप्तारः। 'नप्ता पौत्रः सुपुत्रयः' (अनेकार्थ० ३.३९९)।
• पलं = परा। आगे। सं.-परम्। पालि-परं।
• अपतिये = संतान। सं.-अपत्यम्। (न पतति वंशो यस्मात्)। 'अपत्यं पततिने पित्तुरंगजेन। पुत्रदुहितृभ्ये सन्ताने' (शब्द०)।
• आवकपं = कल्पान्त तक। सं.-यावत्कल्पम्।
• अनुवत्तिसंति = अनुवर्तन करेंगे। सं.-अनुवर्त्तिष्यन्ते।
• सुकटं = पुण्य का काम। सं.-सुकृतम्। 'सुकृतं पुण्ये, धर्मे, शुभे