सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
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७६ / सम्राट अशोक के अभिलेख
• विमानदसणा = देवयान दिखलाने से। सं. - विमानदर्शनात्। (विमानं-
विगतं मानमुपमा यस्य। देवयानम्।)
• हस्तिदसणा = हाथी दिखलाने से। सं. - हस्तिदर्शनात्। पालि-हत्थी-
दस्सनं।
• अगिखंधानि = आग की मशालों को। सं. - अग्निस्कन्धान्। 'स्कन्धाग्निः
स्थूलशाखानिश्रिताग्निस्तु भवेत्समः' (हारा० २०४)। 'स्कन्धः-प्रकाण्डे
आरुहत्तंसं। अंसे, वृक्षस्य काण्डे, नृपे, व्यूहे, युद्धे, समूहे, इत्यादि
(शब्द०)। (अग्निः - अञ्चति ऊर्ध्वं गच्छतीति) (स्कन्धः - स्कन्दते
आरुह्यतेऽसौ सुखेन शाखया वा)। पालि-अग्गिक्खन्धो।
• रुपानि = दृश्य। सं. - रूपाणि। (रूपं रोच