सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 80 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 35

ी, बिना हाड़ वाला मच्छ, वेदवेयक, गंगापुपुटक, संकुज-मत्स्य, कछुआ और शल्यक, पर्णशश, बारकपिंजर, सांड, ओकपिंड, गैंडा, श्वेत कपोत, ग्राम कपोत (और) सभी चौपाये जो उपयोग में नहीं आते और न खाये जाते हैं।`

Wait, look at "कछुवी" in page 53:
छोटी चींटी, कछुवी, बिना हाड़ वाला मच्छ (or कछवी) -> looks like कछुवी or कढवी? In line 2: दडी is translated as कछुवी or कछवी? Ah, दडी -> कछवी or कछुवी.
And बेदवेयक / वेदवेयक.

Let's present both pages clearly, labeling Page 52 and Page 53, line by line.### पृष्ठ ५२

५२ / सम्राट अशोक के अभिलेख

८. ते पि च कति विसंनपयितवे येन मं लघुकं चलेयुति अताथयेनिसं
९. अथा हि पजं वियते धातिपे निसितिज अस्यथ होति वियत धाति
चघति मे पजं सुख