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सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

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पृष्ठ 24

३० / सम्राट अशोक के अभिलेख
१६. अंतला पि च सोतविया
१७. खने संतं एकेन पि सोतविया
१८. हेवँ च कलंतं छघथ संपतिपातयितवे


जौगड शिला : द्वितीय पृथक् अभिलेख / ३१
१६. और (तिष्य के दिनों के) बीच बीच में भी सुना जाना चाहिए।
१७. अवसर मिलने पर भले ही एक व्यक्ति द्वारा ही सुना जाना चाहिए।
१८. और ऐसा करते हुए (आप) सम्यक प्रतिपादन (की दिशा में)
यत्नशील होंगे।