सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
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२६ / सम्राट अशोक के अभिलेख
२३. अंतला पि च तिसेन खनसि खनसि एकैन पि सोतविय
२४. हेवं च कलंतं तुफे चघथ संपटिपदायितवे
२५. एताये अथाये इयं लिपि लिखित हिद एन नगलोवियोहालका ससव
समयं यूजेवू ति.... नस अकस्मा पलिबोधे व अकस्मा पलिकिलेसे व नो सिया ति
२६. एताये च अठाये हकं.... मते पंचसु पंचसु वसेसु निखामयिसामि ए
अखखसे अचंडे सखिनालंभे होसति एतं अठं जानितु.... तथा कलंति अथ मम
अनुसथीति
२७. उजेनिते पि चु कुमाले एताये व अठाये निखामयिस.... हेदिसमेव वगं
नो च अतिकामयिसति तिनि वसानि
२८. हेमेव तखसिलाते पि
२९. अदा अ.... ते महामाता निक्खमिसंति अनुसयानं तदा अगहयितु
अतने कंमं एतं पि जानिसंति तं पि तथा करूँति