सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
DevanagariHindipublished80 पृष्ठ
पृष्ठ 14, कुल 80 में से
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or stha written as sra). In the text: "उस्रानम्हि" - yes, उ, स, ्र, ा, न, म्, ह, ि.
- "अथसंतीरणाय व" - yes.
- "कतव्यमते हि मे सर्वलोकहितं" - yes.
- "तस च पुन एस मूले उस्रानं च अथसंतीरणा च" - yes.
- "नास्ति हि कम्मतं सर्वलोकहितत्या" - wait, is it सर्वलोकहितत्या or सर्वलोकहितत्पा?
Text has: "सर्वलोकहितत्या" (त, ्, य, ा or त, ्, प, ा - looks like तत्या). - "य च किंचि पराक्रमामि अहं किति भूर्तानं आनणं गछेयं इध च नानि" - wait, भूर्तानं or भूतानं?
Text: "भूर्तानं" - wait, looks like "भूर्तानं" (भ, ू with repha on त? No, भूतानं with a mark or भूर्तानं). Let's look closely: "भूतानं" - actually it looks like भूतानं, but wait, there is a repha? No, it's just भूतानं. Wait, look at: "भूतानं आनणं गछेयं". - "सुखापयामि परत्रा च स्वर्गं आराधयंतु त" - wait, "आराधयंतु त" or