सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
DevanagariHindipublished80 पृष्ठ
पृष्ठ 13, कुल 80 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 13
पृष्ठ ८
८ / सम्राट अशोक के अभिलेख
११. भटमयेसु वंभनेसु अनथेसु वुधेसु हितसुखाये धंमयुताये
अपलिबोधाये वियापटा ते
१२. बंधनबधसा पटिविधानाये अपलिबोधाये मोखाये चा एष अनुबधं
पजाव ति वा कताभिकाले ति वा महालके ति वा वियापटा ते
१३. हिदा बाहिरेसु चा नगरेसु सवेसु ओरोधनेसु भातिनं च ने भगिनिना
ए वा पि अंने नातिक्ये सवता वियापटा
१४. ए इयं धंमनिसितो ति वा दानयुतो ति वा सवता विजितम्हि ममा
धंमयुतासि वियापटा ते धंममहामाता
१५. एताये अठाये इयं धंमलिपि लेखिता चिरठितीक्या होतु तथा च मे
पजा अनुवततु
गिरनार शिला : षष्ठ अभिलेख
१. देवा........................ सि राजा एवं आह............
२. अतिक्रांतं अंतर