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आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary

आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा

DevanagariSanskritpublished134 पृष्ठ

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४ गीतिकापादः ॥
कार और भी १८ संख्या जाननी चाहिये। अगर १८ से अधिकसंख्या हों, तो इसी
नियमसे जानना । परन्तु शास्त्रों में १८ संख्या से अधिक का व्यवहार नहीं है।
भा०:—निम्न लिखित चक्र से (अक्षर द्वारा जो इस ग्रन्थ में संख्याओं
का निर्देशहुआ है) गीतिका का अर्थ किया गया है।
संख्याज्ञापक चक्र।
अक्षर । संख्या । अक्षर संख्या ।
अ = १ लृ = १००००००००
इ = १०० ए = १००००००००००
उ = १०००० ओ = १००००००००००००
ऋ = १०००००० औ = १००००००००००००००
क = १ च = ६ ट = ११ त = १६ प = २१ य = ३० श = ७०
ख = २ छ = ७ ठ = १२ थ = १७ फ = २२ र = ४० ष = ८०
ग = ३ ज = ८ ड = १३ द = १८ ब = २३ ल = ५० स = ९०
घ = ४ झ = ९ ढ = १४ ध = १९ भ = २४ व = ६० ह = १००
ङ = ५ ञ = १० ण = १५ न = २० म = २५
और नव स्वरों का योग, यदि वर्ग या अवर्ग अक्षरों के साथ होता है,
तो वे १८ स्थानों के प्रदर्शक होते हैं। जैसे:—
क क्+अ=१ इसी प्रकार और व्यञ्जनों का भी जानना
कि क्+इ=१०० य और य्+अ=३०
कु क्+उ=१०००० यि य्+इ=३०००
कृ क्+ऋ=१०००००० यु य्+उ=३०००००
कॢ क्+लृ=१०००००००० इत्यादि।
के क्+ए=१०००००००००० और
कै क्+ऐ=१०००००००००००० र र्+अ=४०
को क्+ओ=१०००००००००००००० रि र्+इ=४०००
कौ क्+औ=१०००००००००००००००० रु र्+उ=४००००० इत्यादि
इसी प्रकार 'ख' का भी जानना ।
ख ख्+अ=२
खि ख्+इ=२००
खु ख्+उ=२०००० इति संख्यापरिभाषा-समाप्ता ।