आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)
Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary
आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा
पृष्ठ 120, कुल 134 में से
संदर्भ में पढ़ें८४ गीतिकापादः ॥
प्रथमश्चक्रपादो मेषवृषमिथुनाख्यश्चरदलहीनेन दिवसपादेन । चरदलहीना-
भिः पञ्चदशघटीभिः । उदयति । अन्त्यश्च मीनघटमृगाख्यस्तथा चरदलहीनाभिः
पञ्चदशघटिकाभिरुदयति । अतो मृगादिमिथुनान्तानां षण्णां लङ्कोदयास्तद्राशि-
भवचरदलासुभिर्हीनास्स्वदेशोदया भवन्ति । अथान्त्यौ तत्सहितेन । कर्कसिंहक-
न्याख्यस्तुलालिचापाख्यश्च चक्रपादौ चरदलसहितेन दिवसपादेनोदयतः । अतः
कर्यादिचापान्तानां षण्णां राशीनां लङ्कोदयास्तत्तच्चरदलयुतास्स्वदेशोदया भव-
न्ति । क्रमोत्क्रमतः । प्रथमपादे प्रथमराशेर्मेषस्य लङ्कोदये प्रथमराशिभवं चरद्-
लं शोध्यम् । वृषस्य द्वितीयस्य लङ्कोदये द्वितीयराशिभवं चरदलं शोध्यम् । तृ-
तीयस्य मिथुनस्य लङ्कोदये तृतीयराशिभवं चरदलं शोध्यम् । द्वितीयपादे तूत्क्र-
मेण देयम् । कर्कटस्य तृतीयराशिचरदलं देयम् । सिंहस्य द्वितीयराशिचरदलं दे-
यम् । कन्यायाः प्रथमराशिचरदलं देयम् । तृतीयपादे क्रमेण देयम् । चतुर्थपाद
उत्क्रमेण शोध्यम् । इत्युक्तं भवति । गोलस्योत्तरोन्नतत्वान्मीनादयश्शीघ्रमुद्य-
न्ति । अतस्तेषु चरदलं शोध्यम् । तस्मादेव कर्कटादयश्शनैरुद्यन्ति । अतस्तेषु
चरदलं देयम् ॥ इष्टकाले शङ्कानयनमाह ।
भा०:—प्रथम चक्र पाद अर्थात् मेष, वृष, मिथुन नामक है । चरदल
हीन द्वारा दिवसपाद से अर्थात् १५ घटिका करके उदय होता है । और
अन्त्य अर्थात् मीन, कुम्भ, मकर, नामक पाद है, सो १५ घटिका करके उदय
होता है , इसलिये मकर, कुम्भ, मीन, मेष, वृष, मिथुन, इन छः राशियों का
उदयास्त १५ प्राण हीघटा करके स्वदेशोदय होता है ॥ और कर्क, सिंह, कन्या,
तुला, वृश्चिक, धनु, क्रम से प्रथम तीन राशि द्वितीय पाद और दूसरा तीन
राशि तृतीय पाद है । १५ घटिका जोड़ने से उदय होता है । अतएव कर्कादि
धनु पर्य्यन्त छः राशियों का लङ्कोदय उस उस १५ प्राण के जोड़ने से स्वदेशोदय
होता है । प्रथम पाद में प्रथम राशि मेष राशि के लङ्कोदय में प्रथम राशि से
उत्पन्न चरदल घटावे । वृष राशि अर्थात् द्वितीय राशि के लङ्कोदय में द्वितीय
राशि भव चरदल घटावे । तृतीय मिथुन राशि के लङ्कोदय में तृतीय राशि
भव चरदल घटावे । और द्वितीय पाद में कर्कट राशि का तृतीय चरदल
जोड़े । सिंह राशि के तृतीय राशि के चरदल जोड़े । चतुर्थ पाद में उत्क्रम
करके घटावे । गोल के उत्तर उन्नत होने से मीन आदि राशि शीघ्र उदय
होती है, अतएव उन में चरदल घटायी जाता है । और कर्कट आदि राशि
धीरे २ उदय होती है इस लिये उन में चरदल जोड़ा जाता है ॥२१॥