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आनन्दमठ (वन्दे मातरम् एवं संन्यासी विद्रोह इतिहास)

आनन्दमठ (वन्दे मातरम् एवं संन्यासी विद्रोह इतिहास)

Anandamath with Vande Mataram - Bankim Chandra

बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

पृष्ठ 13, कुल 78 में से

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पृष्ठ 13

सुहासिनी सुमधुरभाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम् । ''.....
महेद्र बोले-‘ ‘यह तो देश है, यह तो मां नही है। ’’
भवानंद ने कहा-‘ ‘हमलोग दूसरी किसी मां को नही मानते। ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’- हमारी
माता, जन्मभूमि ही हमारी जननी है- हमारे न मां है, न पिता है, न भाई है- कुछ नही है, स्त्री भी नही, घर भी
नही, मकान भी नही, हमारी अगर कोई हैं तो वही सुजला, सुफला, मलयजसमीरण-शीतला,
शस्यश्यामला.....’’
अब महेंद्र ने समझकर कहा-‘ ‘तो फिर गाओ !’’
भवानंद फिर गाने लगे-
‘‘वन्दे मातरम् !
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम
शस्यश्यामलां मातरम्............।’’
‘‘शुभ्र ज्योत्स्ना-पुलकित यामिनीम्
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्
सुहासिनी सुमधुरभाषिणीम्
सुखदां, वरदां मातरम् ।।
वन्दे मातरम्.........
सप्तकोटिकण्ठ-कलकल निनादकराले,
द्विसप्तकोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
अबला केनो मां तुमि एतो बले !
बहुबलधारिणीम् नमामि तारिणीम्
रिपुदलवारिणीम् मातरम् ॥ वन्दे........
तुमी विद्या, तुमी धर्म,
तुमी हरि, तुमी कर्म,
त्वं हि प्राण : शरीरे।
बाहुते तुमी मां शक्ति,
हृदये तुमी मां भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गड़ी मन्दिरे-मन्दिरे।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरण धारिणी,
कमला कमल-दल-विहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वं
नमामि कमलां, अमलां, अतुलाम,
सुजलां, सुफलां, मातरम्
वन्दे मातरम् ॥
श्यामलां, सरलां, सुस्मितां, भूषिताम्
धरणी, भरणी मातरम् ॥ वन्दे मातरम्...’’