अमृतानुभव एवं चांगदेव पासष्टी (सन्त ज्ञानेश्वर - चिद्विलासवाद एवं अद्वैत अनुभूति सटीक)

अमृतानुभव एवं चांगदेव पासष्टी (सन्त ज्ञानेश्वर - चिद्विलासवाद एवं अद्वैत अनुभूति सटीक)
Amritanubhava and Changdev Pasashti of Sant Jnanadev
सन्त ज्ञानेश्वर / ज्ञानदेव महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished138 पृष्ठ
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आतां ज्ञानदेवो म्हणें । श्री गुरुप्रणामें येणें ॥
फेडिलीं वाचा ऋणें । चौहीं वाचांचीं ॥