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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 93, कुल 297 में से

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नेतृत्व की क्षमता वाले नेता थे रामप्रसाद बिस्मिल, योगेश चटर्जी,
शचीन्द्रनाथ सन्याल, गेंदालाल दीक्षित। शचीन्द्र नाथ सन्याल की पुस्तक
'बंदीजीवन' तो क्रांतिकारी आन्दोलन के लिए पाठ्य पुस्तक ही बन गयी
थी।¹ अक्टूबर 1924 में क्रांतिकारी युवकों का कानपुर में एक सम्मेलन
हुआ। इसके तहत 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' का गठन किया
गया। इसका उद्देश्य था सशस्त्र क्रांति के माध्यम से औपनिवेशिक सत्ता
को उखाड़ फेंकना और एक संघीय गणतंत्र 'संयुक्त राज्य भारत' की
स्थापना करना था।² इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रचार की जरूरत थी।
नवयुवकों को अपने दल में मिलाना, प्रशिक्षित करना और हथियार जुटाने
जैसे कार्य मुख्यतः थे। इस सब कार्यों के लिए पैसे की आवश्यकता थी।
हिन्दुस्तान रिपब्लिकन आर्मी ने पैसा एकत्र करने के उद्देश्य से काकोरी
जैसी बड़ी घटना को सम्पादित किया। सरकारी खजाना लूटने की यह
घटना 'काकोरी काण्ड' के नाम से प्रसिद्ध है।³
9 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश के क्रांतिकारियों ने सहारनपुर
लखनऊ लाइन पर काकोरी जाने वाली गाड़ी को सफलता पूर्वक लूट
लिया। इस काकोरी काण्ड के अभियोग में जनता ने बहुत सी सहानुभूति
का प्रदर्शन किया। विधान परिषद में प्रस्ताव रखे गये। उनके नेता राम
प्रसाद बिस्मिल यह कहते हुए कि - 'मैं अंग्रेजी राज्य के पतन की इच्छा
करता हूँ प्रसन्नता पूर्वक फाँसी पर लटक गये।

  1. भारत का स्वतंत्रता संघर्ष - बिपिन चन्द्र, पृष्ठ-190
  2. भारत का स्वतंत्रता संघर्ष - बिपिन चन्द्र, पृष्ठ-190
  3. भारत का स्वतंत्रता संघर्ष - बिपिन चन्द्र, पृष्ठ-190
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