अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहाँ इतना अवश्य था कि उन्हें अपने बल पर विश्वास था। खुद के
विचारों में स्वस्थ मानसिकता बना लेना अशफाक की खूबी थी। देश के
सशस्त्र क्रांति के प्रयास में अपने जीवन की आहुति देने वाले अशफाक
उल्ला खाँ ने जब क्रांतिकारी आन्दोलन में प्रवेश किया तो वे छात्र ही थे।
फाँसी के समय उनकी उम्र मात्र 27 वर्ष की थी। अशफाक का क्रांतिकारी
जीवन लगभग सात वर्ष का रहा और इतने ही अल्पकाल में वे देश की
राजनीति और समाज की धड़कन से परिचित हो गये थे। अशफाक उल्ला
खाँ सिर्फ एक सिपाही ही नहीं थे कि लड़े और मृत्यु को प्राप्त हो गये।
वे हमारे समय के क्रांतिकारियों में प्रखर चिन्तक के रूप में भी हमारे बीच
उपस्थित होते हैं। उनकी कविताएँ एवं उनके वैचारिक लेख और राष्ट्र के
नाम संदेश तथा उनके द्वारा लिखे गये पत्रों से स्पष्ट हो जाता है कि वे
किस हद तक वैचारिक धरातल पर दृढ़ थे। यह स्पष्ट है कि क्रांतिकारी
गतिविधियों, फरारी जीवन, जेल की जिन्दगी में से ऐसा समय ही नहीं
मिला कि वे बाकायदा अपने विचार लिपिबद्ध कर पाते।
इन्ही में से समय निकाल कर जो उन्होंने लिखा है वह बहुत थोड़ा
है, जिसे पढ़कर लगता है कि वे चाहते हुए भी अपने सोचे हुए को कागज
पर उतार नही सके। वे बहुत कुछ लिखना चाहते थे, वे बच्चों के लिए
पुस्तकों की रचना करना चाहते थे, उन्हें भावी पीढ़ी की बहुत चिन्ता थी,
लेकिन उनकी इच्छा अधूरी रह गयी। उनके लिखे पत्रों, कविताओं और
डायरी में लिखे अंशों से हमें उनके जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
मिलती हैं।
देश की स्वतंत्रता और हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए शहीद होने वाले
अशफाक ने फाँसी से पहले अपनी डायरी में हिन्दुस्तान का नक्शा भी
बनाया था और देखने से लगता है कि वे खूब रोये थे। सुनने-देखने में
यह भी आता है कि आँसुओं के निशान अभी तक ज्यों के त्यों हैं।
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