अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 10, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंआज भी देश के नाम उनका संदेश प्रासंगिक है। उनकी कविताएं
हमें एक सूत्र में बाँधती हैं।
न कोई इंगलिश, न कोई जर्मन,
न कोई रशियन, न कोई तुर्की।
मिटाने वाले है अपने हिंदी,
जो आज हमको मिटा रहे हैं।
यह कहना सर्वथा गलत है कि क्रांतिकारियों के पास कोई विचार
नहीं था। अपने संदेश में अशफाक ने स्पष्ट कहा है कि वे किस तरह की
आज़ादी चाहते हैं। अशफाक की कल्पना समाजवादी थी, जहाँ कोई ऊंच
है न नीच। अशफाक ने किसान, मजदूरों की तरक्की की बात भी कही।
वे कारखानों और गांवों में लोगों के बीच जमकर काम करने में विश्वास
रखते थे। अशफाक शोषण के कारणों की बात करते है और उसके
खिलाफ जंग लड़ने की बात करते हैं।
<u>देश वासियों के नाम भेजा गया संदेश</u>
‘‘बिरादराने वतन की खिदमत में उनके उस भाई का सलाम पहुँचे
जो उनकी इज्जत व नामू से वतन की खातिर फैजाबाद जेल में कुर्बान हो
गया। आज जबकि मैं यह पैगाम बिरादराने वतन को भेज रहा हूँ, इसके
बाद मुझको तीन दिन और चार रातें और गुजारनी हैं और फिर मैं हूँगा
और आगोशे मादी वतन होगा। हम लोगों पर जो जुर्म लगाये गये थे
वह इस सूरत में पब्लिक में लाए गये कि हमको बहुत से लोग
गेरेतालीमय़ाफ्ता या हुकूमत के दस्तरख्वान की पसेखुर्दा हड्डियाँ चचोड़ने
वाले थे, डाकू, खूनी, कातिल के लकब से पुकारा किए। मैं आज इस
फाँसी की कोठरी में बैठा हुआ भी खुश हूँ और अपने उन भाइयों का
शुक्रिया अदा करता हूँ। और कहूँगा -
195