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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

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अध्याय-दस
उपसंहार
अशफाक उल्ला खाँ का जीवन साम्प्रदायिक एकता और देश को
स्वतंत्र करने की मानसिकता में बीता। यही कारण था कि वे एक आदर्श
युवा की भाँति युवाओं में प्रेरणा के स्तम्भ बने रहे। अशफाक के बलिदान
के बाद तमाम प्रतिक्रियाएं हुईं और अशफाक की भरपूर सूचना ली गयी।
वे मिसाल बन गये। यह बात और है कि अशफाक की फाँसी से युवा
वर्ग निराश जरूर हुआ लेकिन वहीं वह ऊर्जा को भरकर नये भारत की
कल्पना में आ गया।
क्रांतिकारियों को फाँसी की सजा से निराशा व क्षोभ तो हुआ और
इसे बनारस से प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र ने जनता की इस
असहाय स्थिति पर खेद भी प्रकट किया। इलाहाबाद से प्रकाशित पत्रिका
'चाँद' (नवम्बर 1928) अंक फाँसी विशेषांक के रूप में निकला।¹
अखिल भारतीय कांग्रेस ने अपने अधिवेशन में सरकार की तीव्र
आलोचना की कि उसने जनता की भावनाओं की उपेक्षा करके
क्रांतिकारियों को फाँसी की सजा दी। क्रांतिकारियों के परिवार के प्रति
कांग्रेस ने अपनी सहानुभूति प्रदान की।²
अशफाक उल्ला खाँ अपने खानदान पर लगे दाग धो देना चाहते
थे और उन्होंने अपने कृतित्व से यह दाग धो भी डाला। अशफाक का
प्रारम्भिक जीवन सिर्फ खेलकूद में ही नहीं वरन् देश की चिन्ता और आम
लोगों को शोषण से निजात दिलाने के वैचारिक मंथन में बीता। वे हमेशा
धीर-गम्भीर बने रहते और कभी अपनी सुन्दरता और देह बल का
अभिमान न करते।
1.स्वतंत्रता आन्दोलन में जनपद शाहजहाँपुर का योगदान-डॉ०एन.सी.मेहरोत्रा पृष्ठ144
2.दि हिस्ट्री ऑफ दि इंडियन नेशनल काँग्रेस, भाग-एक-पृष्ठ 540, पट्टाभि
सीतारमैया
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