अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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कविताएँ अण्डमान भेजने वालों और फाँसी पर लटकाने वालों की देह पर
पिघला कर शीशा डालने को कहती हैं। कहीं कुलीगीरी प्रथा का विरोध है
तो कहीं निरंकुशता से उत्पन्न हुए संत्रास, बेचैनी। क्रांतिकारियों पर विदेशी
सत्ता के गुप्तचर विभाग की कड़ी नजर रहती थी। तलाशियों,
गिरफ्तारियों का सामना करते ये क्रांतिकारी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए
सदैव भूखे रहते थे। शायद यही भूख जो कभी मिटी नहीं, अशफाक
उल्ला खाँ में भी थी।
काकोरी काण्ड के पूर्व भी कई डकैतियाँ डाली गयी थीं, जिसका
प्रभाव अशफाक पर निश्चित ही पड़ा था। खास तौर पर शाहजहाँपुर के
क्रांतिकारियों द्वारा किये गये कार्यों का असर तो अशफाक पर पड़ना ही
था।
- खंडा खेला (तिलहर थाना निगोही): - जून 1918 के तीसरे सप्ताह का
वह दिन डकैती के लिए क्रांतिकारियों ने नियुक्त कर रखा था। इस दिन
क्रांतिकारी खंडा खेड़ा ग्राम के प्रमुख के घर डाका डालने हेतु गये। इस
गाँव में एक बारात आयी थी। घर में प्रवेश की युक्ति नहीं सूझी। देर
होने पर ग्रामवासी सतर्क हो गये और क्रांतिकारियों को बिना कार्य
सम्पन्न किये वापस आना पड़ा।¹ - परेली (शाहाबाद, हरदोई) :- क्रांतिकारियों ने 23 जून 1918 को हरदोई
के शाहाबाद नामक थाने के अन्तर्गत परेली में एक विधवा ब्राह्मणी के घर
डाका डाला। यह विधवा ब्राह्मणी क्रांतिकारी राजाराम बाजपेई की मौसी
थी। राजाराम ने ही उस विधवा के कंधे पर छूरा रखा और चाभियाँ प्राप्त
की। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार डकैती में क्रांतिकारियों ने दस हजार
रूपये लूटे। - स्वतंत्रता आदोलन में जनपद शाहजहाँपुर का योगदान, एन०सी०
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