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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 297 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 88

गंगा सिंह ने अंग्रेजी उद्धरणों का इसमें समावेश किया था। इस पुस्तक
के शीर्षक पृष्ठ पर ये शब्द अंकित थे - ''हे वीर भारतीयों उठो, अस्त्र
उठाओ, अपनी तलवार खोलो और साहस के साथ आगे बढ़ो। विजय
प्राप्त करो या युद्ध क्षेत्र पर अपने जीवन का बलिदान करो। विदेशी
शासन ही अकाल और भारत की सब आपत्तियों का उत्तरदायी है।
स्वतंत्रता के लिये तलवार उठाना पाप नहीं।'' इस पर्चे में बनारस षड्यंत्र
के मुखबिरों की भी राजद्रोही कहकर भर्त्सना की गयी थी। इस पुस्तक में
उल्लेख किया गया था कि इंग्लैण्ड का तुच्छतम निवासी भी अपने को
सर्वप्रभु समझता है और हमें अपना गुलाम समझता है। इस पुस्तक का
समापन कविता से होता है, जिसका आशय है - 'हम बाग को नष्ट
करने वालों को पाठ पढ़ायेंगे... हे हत्यारे! दैनिक उत्पीड़न अच्छा नहीं है।
हमें बताओ कि तुम्हारे और हमारे बीच अन्तिम फैसला कब होगा?¹
24 दिसम्बर 1918 को उ०प्र० सरकार के आदेशानुसार यह पुस्तक जब्त
कर ली गयी। क्रांतिकारी संस्था के सदस्यों में अंग्रेजी सत्ता को समाप्त
कर देने की इतनी आग थी और तड़पन थी कि वे स्वतंत्रता की वेदी पर
मर-मिटने को तैयार रहा करते थे। उस समय की कविताओं का अर्थ यही
संकेत देता है। उदाहरण - 'हृदय में उस समय तक विश्राम नहीं लूँगा जब
तक भारत में अपना ही शासन फिर से स्थापित नही करूँगा, गौरव से
अलंकृत नही करूँगा और शत्रु से कोहनूर वापिस नहीं लूँगा। अगर मैं
इसमें असफल रहा तो अपना सिर काट लूँगा या अपने को डुबा दूँगा या
अपने को अग्नि की भेंट कर दूँगा।' कविताओं के आशय स्पष्ट रूप से
विद्रोहात्मक थे और आग उगलते शब्द जोश पैदा करते थे।

  1. मैनपुरी जनपद का राजनैतिक इतिहास, चिन्तामणिशुक्ल, पृष्ठ-82
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