अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 87, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ें‘‘अब तक वैसे ही स्वराज्य के प्रलोभन में हमें फँसाया जा रहा है लेकिन
कोई भी देश कभी तलवार पकड़े बिना स्वतंत्र नहीं हुआ है। अब हे देश
प्रेमियों! वीर शिवाजी और प्रताप के समान अपनी तलवार उठाओ और
प्यारी भारत माता के उत्पीड़कों को पाठ पढ़ाओ। भारत के प्रत्येक स्त्री
पुरुष प्रतिज्ञा लो कि जब तक दुष्ट बेईमान, धोखेबाज और छद्मी एवं धूर्त
अंग्रेजों को, जो भारत के उत्पीड़क हैं, हम नहीं निकाल देंगे तब तक हम
प्रिय से प्रिय कार्यों को जिसमें हम संलग्न हैं, भूल जायेंगे और अपनी
सम्पूर्ण शक्तियों को हम इस कर्तव्य में लगा देंगे। उन्हें स्पष्ट समझा दो
कि अब भविष्य में हम तुम्हारी धूर्ततापूर्ण चालाकियों से प्रवंचित नहीं
होंगे। हमारा प्रमुख लक्ष्य और उद्देश्य है और हमेशा यह रहेगा कि हम
उनका सम्पूर्ण विनाश करेंगे।’’
‘‘अब सब भारतीयों को एक स्वर से घोषित करना है कि भविष्य में
हिन्दुस्तान वास्तविक हिन्दुस्तान होगा’’¹। उक्त पर्चा 1 मार्च 1918 की
रात को लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, आगरा, मथुरा, बरेली, फैजाबाद,
शाहजहाँपुर, तिलहर, पोवान, इटावा, गोंडा, मिर्जापुर, सुल्तानपुर, हरदोई
में चिपकाये गये। शिवकृष्ण, गोपीनाथ, दलपत, राम नारायण, सिद्ध
गोपाल, प्रभाकर और चन्द्रधर ने उक्त पर्चे चिपकाये। बस्ती में 2 मार्च
1918 की रात में पर्चे चिपकाये गये। ‘अंग्रेजों को मारो और स्वतंत्र बनो’
शब्दों से युक्त पर्चे मैनपुरी, मेरठ, एटा और फतेहगढ़ डाक द्वारा भेजे
गये। यह कार्य छात्र प्रभाकर ने किया।² मार्च 1918 के लगभग ‘अमेरिका
को स्वाधीनता कैसे मिली’ नामक पुस्तक का प्रकाशन लखनऊ से हुआ।
इस पुस्तक का संकलन ‘अमेरिका की स्वाधीनता का इतिहास’ नामक
पुस्तक के आधार पर देव नारायण ने किया था।
- मैनपुरी जनपद का राजनैतिक इतिहास, चिन्तामणिशुक्ल, पृष्ठ-81
- मैनपुरी जनपद का राजनैतिक इतिहास, चिन्तामणिशुक्ल, पृष्ठ-81
62