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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 297 में से

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पृष्ठ 86

''ओ३म्
वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् - स्वदेशाभिमानियों को संदेश -
''वीर पुरुषों, आगे आवो और फोर्ट विलियम पर अधिकार करो। वह
कितने अंग्रेज हैं? उनको जल्दी बिन लो। प्रिय साथियों, देशवासियों, हम
सब जानते है कि जिस प्रकार भारत की सोने की चिड़िया पिछले 600
वर्षों में विदेशियों के अत्याचार से पीड़ित रही है। चार सौ वर्षों तक यवनों
ने हमारी मातृभूमि को आक्रान्त किया लेकिन उन्होंने केवल हमारे भौतिक
शरीरों को ही पीड़ित किया था, मगर अपनी सभ्यता की डींग हाँकने वाले
अंग्रेजों ने तो एक सौ साल के अन्दर हमारी सारी सम्पत्ति लूट ली और
इसे लूट कर इग्लैण्ड ले गये। उन्होंने हमारी महानता को नष्ट कर दिया
है और हमारे पुरुषों को स्त्रियों में परिवर्तित कर दिया है। हम सब उनकी
कूटनीति के शिकार बना दिये गये हैं। उन्होंने हमें झूठे प्रलोभन से ठगा
है और इस प्रकार का जाल हमारे चारों तरफ फैलाया है कि हर कदम पर
हमें इसके काँटे चुभते हैं। किसी ने सत्य ही कहा है -
अपने प्रति
''तुमने भारत के लोगों को प्रेम से आकर्षित किया
और फिर उन्हें ही मार डाला,
तुम हमारी प्रतिमा बने, तुमने हमें अपना
उपासक बनाया और फिर हमें ही मार डाला।
यह हमारी हत्या कितनी भयंकर है
तुमने हमें अपना बनाया और फिर हमें ही मार डाला।
वे जो मृत्यु के सन्निकट थे,
उन्हें बार-बार जीवित किया और फिर उन्हें मार डाला।''¹

  1. मैनपुरी जनपद का राजनैतिक इतिहास, चिन्तामणि शुक्ल-पृष्ठ 80
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