सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 81, कुल 297 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 81

अध्याय-चार
उत्तर प्रदेश में क्रांतिकारी आन्दोलन
उत्तर प्रदेश में क्रांतिकारी आन्दोलन की भूमिका महत्वपूर्ण है।
क्रांतिकारी आन्दोलन की बढ़ती लहर इस प्रान्त में भी ठहरी नहीं थी। यह
प्रदेश तीन काण्डों (षड्यन्त्रों) के द्वारा इतिहास में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त
कर चुका है-बनारस षड्यंत्र, मैनपुरी षड्यंत्र और काकोरी काण्ड।
1899 में लार्ड कर्जन को भारत का वाइसराय नियुक्त किया गया
था। कर्जन ने राष्ट्रीय आन्दोलन को पूरी शक्ति के साथ दमन करने और
खुले नसली भेदभाव की नीति का अनुसरण किया। वायसराय कर्जन
भारतीय बुद्धिजीवियों से घृणा करता था, उसने कर के द्वारा शहरी मध्यम
वर्गों के व्यापक हिस्सों को गम्भीर नुकसान पहुँचाया। 1898 और 1904 में
भारतीय राष्ट्रीय प्रेस के खिलाफ निर्दिष्ट सरकारी गोपनीयता कानून को
अधिक व्यापक कर दिया गया।¹ कर्जन की दमनकारी नीतियों ने
उपनिवेशवाद विरोधी रुख़ों को मजबूत बनाने तथा क्रांतिकारी आन्दोलन
को बढ़ाने में ही सहायता की।
क्रांतिकारी उत्थान के कई कारण हो सकते हैं लेकिन मुख्यतः वही
कारण थे जिनसे राष्ट्रीय आन्दोलन में उग्रवाद का उदय हुआ। भेद यह
था कि क्रांतिकारी शीघ्र परिणाम चाहते थे। उदारवादी दल ने प्रेरणा को
लोकप्रिय बनाया था। उग्रवादियों ने धीमें प्रभाव की नीति को अपनाया
था² लेकिन क्रांतिकारी इन सब चीजों में विश्वास नहीं करते थे।
क्रांतिकारियों का विश्वास था कि राष्ट्रीय जीवन में जो भी उपयुक्त तत्व
हैं, उसे विदेशी सत्ता समाप्त कर देगी चाहे धार्मिक,

  1. भारत का इतिहास, ग्रि० कोतोस्की, कोअ० अंतोनोवा, पृष्ठ 502
  2. आधुनिक भारत का इतिहास, बी०एल०ग्रोवर, पृष्ठ 309
    56