अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
DevanagariHindipublished297 पृष्ठ
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कर्मवीर बन जाओ प्यारो! हे भारत के वीरो!
बंधन मुक्त करो!...
- पं० गेंदालाल दीक्षित द्वारा गाये जाने वाले प्रिय गीत इस प्रकार हैं -
'...नौजवानों यह मौका है, उठो खुल खेलो।
और जो सर पै बला आये, खुशी से झेलो।।
देश के नाम पर, सिदके में जवानी दे दो।
फिर न मिलेंगी ये माता की दुआयें ले लो।। - क्रांतिकारियों की प्रतिज्ञा का गीत -
'है देश को स्वाधीन करना जन्म इस संसार में,
तत्पर रहूँगा मैं सदा अंग्रेज दल संहार में,
अन्याय का बदला चुकाना मुख्य मेरा धर्म है,
मद-दलन अत्याचारियों का यह प्रथम शुचिकर्म है।
अंग्रेज-रुधिर-प्रवाह में निज पितृगण तर्पण करूँ,
अंग्रेज सिर सहित भक्ति में जननि के अर्पण करूँ,
होते हमारे मात जग में पददलित होगी नहीं,
रहते करोड़ों पुत्र के जननी दुखित होगी नही,
हे ईश। भारतवर्ष में शतवार मेरा जन्म हो,
कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो,' - क्रांतिकारी शिव कृष्ण द्वारा गाया जाने वाला गीत -
'जुबां को बन्द करे या मुझे लासीर करे।
मेरे ख्याल को बेड़ी पिन्हा नहीं सकते।।
खुशी से जेल को दे या चढ़ाय शूली पर।
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