अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमैनपुरी षड्यंत्र केस का निर्णय :- मैनपुरी षड्यंत्र केस का निर्णय
1 सितम्बर 1919 को अंग्रेज न्यायाधीश मि० किस ने सुनाया। इस निर्णय
में दम्भी लाल पांडे, सिद्ध गोपाल, गोपीनाथ को 7 वर्ष की सजा,
श्रीचन्द्रधर जौहरी को 5 वर्ष की सजा, किढ़ोरी लाल गुप्त, मुकुन्दी लाल,
राजाराम बाजपेई, मिजाजी लाल को 3 वर्ष की सजा सुनाई गयी। शिव
चरन लाल शर्मा, प्रभाकर शर्मा, फतहसिंह को जेल और दण्ड दिया गया।
ठाकुर प्रसाद, रामरतन, रामदीन, कालीचरन, शम्भु दयाल सक्सेना साक्ष्य
के अभाव में छोड़ दिये गये।¹ निश्चित ही मैनपुरी काण्ड का प्रभाव
अशफाक उल्ला खाँ पर इतना पड़ा कि उनका जीवन ही बदल गया। वे
आम नागरिकों से ऊपर उठ गये।
मैनपुरी षड्यंत्र के क्रांतिकारियों के गीत :-
गीतों, कविताओं ने ऊर्जायुक्त होने में काफी सहयोग दिया है, यही
कारण है कि क्रांतिकारी इनसे प्रेरणा पाने एवं समर्पित होने का उत्साह
पाते एवं तैयार होते। निश्चित एक लय ही ऐसी है जो मानसिक खुराक
देती है।
- पं० गेंदालाल दीक्षित द्वारा संचालित 'शिवाजी समिति में गाया जाने वाला प्रिय
सैनिक गीत -
'उठो! उठो!! उठो!!!
'उठो! उठो!! उठो!!!
बंधन मुक्त करो मैय्या को, हे भारत के वीरो!
हे भारत के वीरो!!
नाम कमाया जो पुरखों ने, क्या हम उसे गँवायेंगे
दूध पिया है भारत माँ का, क्या हम उसे लजायेंगे
- मैनपुरी जनपद का राजनैतिक इतिहास, चिन्तामणिशुक्ल, पृष्ठ 74,75 एवं
मैनपुरी षणयंत्र केस, पत्रांक सं0 11/919-राजकीय अभिलेखागार,
लखनऊ।
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