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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 79, कुल 297 में से

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यह गन मशीन तेरे अब, डरा नहीं सकते।।
आत्मा अमर है शिव जिस्म है नश्वर मेरा।
लाख यह यत्न करे, पर मिटा नहीं सकते।।¹
राम प्रसाद बिस्मिल तो खुद ही समर्थ रचनाकार थे, उनके गीत
और उनकी गजलें क्रांतिकारियों की जुबान पर चढ़ी रहती थी। कविताओं
की संवेदनात्मक यात्रा देखें तो स्पष्ट हो जायेगा कि क्रांतिकारियों के हृदय
में कितनी तड़प, टीस और बेचैनी थी, जो काव्य के माध्यम से सम्प्रेषित
होती रहती थी। अशफाक भी एक अच्छे रचनाकार थे। उ०प्र० का मैनपुरी
काण्ड भारत वर्ष के क्रांतिकारी आन्दोलन की एक विशेष कड़ी है। इस
काण्ड से अशफाक ही नहीं कई युवा क्रांतिकारियों को प्रेरणा मिली होगी।
संयुक्त प्रान्त में बनारस षड्यन्त्र के बाद यह दूसरा षड्यंत्र था। यह
षड्यंत्र अन्य षड्यन्त्रों की अपेक्षा कई विशेषताएं रखता है। इस षड्यंत्र की
पहली विशेषता बड़ी विचित्र है जो जज ने अपने फैसले में खुले शब्दों में
प्रकाशित की है - ‘‘यह बड़े दुर्भाग्य का विषय है कि शिव कृष्ण के भाग
जाने के बाद कोई भी असली नेता कचहरी में मौजूद नहीं। यदि वे लोग
कोर्ट में होते तो उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाती।''²

  1. मैनपुरी जनपद का राजनैतिक इतिहास, चिन्तामणिशुक्ल, पृष्ठ-79
  2. राम प्रसाद बिस्मिल रचनावली, दिनेश शर्मा, पृष्ठ-160
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